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TDS Saving Tips : ये फॉर्म भरने से ही बच जाएगा आपका TDS, तुरंत नोट कर लें ये जरूरी बातें

Tax Deducted at Source (TDS): आपको बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से सभी फॉर्म जारी कर दिए गए हैं।ऐसे में बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें सभी टैक्स जमा  कर देना चाहिए। आपको बता दें कि अगर कोई व्यक्ति या ऑर्गेनाइजेशन टैक्स के दायरे में आता है तो उसे टैक्स का भुगतान करना होगा।सरकारी नौकरी हो या गैर-सरकारी नौकरी जो इनकम टैक्स की लिमिट में नहीं आते उनका भी टीडीएस कटता है।TDS किसी व्यक्ति की मासिक आय का वह हिस्सा है, जिस पर पेमेंट के पॉइंट से टैक्स लगता है।आइए जानते हैं इसके बारे में।
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TDS Saving Tips : ये फॉर्म भरने से ही बच जाएगा आपका TDS, तुरंत नोट कर लें ये जरूरी बातें

HBN News Hindi (ब्यूरो) :बैंक अधिकारियों की मानें तो जो भी खाताधारी (how to save tds on interest income)इनकम टैक्स के घेरे में नहीं आते हैं, लेकिन उनके खाते के साथ फिक्स डिपॉजिट और आरडी खाता चालू है,तो भी आपका टीडीएस कट सकता है। टीडीएस से बचने में 15G और 15H फॉर्म आपकी मदद करेगा। इससे खाताधारियों की जमा पूंजी में मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं कटता हैं। आइए जानते  हैं।

 

 

फॉर्म 15जी या 15एच जमा कर बचा सकते हैं टीडीएस 


आयकर विभाग के मुताबिक, टीडीएस के कॉन्सेप्ट को आय के स्रोत से ही टैक्स इकट्ठा करने के मकसद से पेश किया गया था। इसके मुताबिक, स्रोत पर टैक्स कटता और उसे केंद्र सरकार के खाते में भेज दिया जाता है। जिस ( tds on interest income)कटौतीकर्ता का इनकम टैक्स स्रोत पर काटा गया है, वह कटौतीकर्ता द्वारा जारी फॉर्म 26एएस या टीडीएस सर्टिफिकेशन के आधार पर काटी गई राशि का क्रेडिट पाने का हकदार होता है।

 

 

नियम के मुताबिक, जहां ब्याज से इनकम  40,000 रुपये से अधिक है, वहां बैंकों को टीडीएस काटना जरूरी है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194ए के मुताबिक किसी विशेष वित्तीय वर्ष में ब्याज से इनकम पर टीडीएस लागू करने की लिमिट 40,000 रुपये और(tds on fd interest) वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 50,000 रुपये है। इससे ज्यादा होने पर टीडीएस कटता है। हालांकि, यदि संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित कर देनदारी शून्य है, तो करदाता फॉर्म 15जी या 15एच जमा कर सकता है। बैंक से अनुरोध करें कि वे अपनी ब्याज आय से कोई टीडीएस न काटें।

 

हर वित्तीय वर्ष के लिए अलग से जमा 


फॉर्म 15जी या 15एच फॉर्म आम तौर पर बैंकों या वित्तीय संस्थानों के संबंधित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं, या उन्हें संबंधित बैंक शाखा में खुद जाकर जमा किया जा सकता है। इसके अलावा, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फॉर्म सिर्फ एक वित्तीय वर्ष के लिए वैलिड हैं और इन्हें हर वित्तीय वर्ष के लिए अलग से जमा किए जाना चाहिए।

 

फॉर्म 15जी जमा करने के लिए पात्रता दर


आयकर नियम, 1962 के नियम 29सी के साथ आईटी (Tax Deducted at Source)अधिनियम की धारा 197ए(1ए) के मुताबिक, फॉर्म 15जी 60 वर्ष से कम आयु वाले निवासी व्यक्तियों या एचयूएफ या यहां तक ​​कि एक ट्रस्ट या किसी अन्य निर्धारिती द्वारा जमा किया जा सकता है जिनका वित्तीय वर्ष के दौरान अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य है। कोई भी कंपनी या फर्म या गैर-निवासी फॉर्म 15G जमा करने के लिए पात्र नहीं होते हैं।

 

 

फॉर्म 15H  वरिष्ठ नागरिक द्वारा किया जा सकता है जमा


आयकर नियम, 1962 के नियम 29सी के साथ आईटी अधिनियम की(Form 15G)धारा 197ए(1सी) के मुताबिक,फॉर्म 15एच उन निवासी व्यक्तियों द्वारा जमा किया जा सकता है जो वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी अनुमानित कर देयता है वित्तीय वर्ष में शून्य है।

 

वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी समय जमा 


जानकारों का कहना है कि किसी भी निवेशक या अकाउंट होल्डर को यह (interest income)फॉर्म वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले जमा कर देना चाहिए जिसके लिए टीडीएस काटा जाना है या पहले आय भुगतान से पहले जमा किया जाना चाहिए जो टीडीएस के अधीन है। हालांकि, इन्हें वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी समय जमा किया जा सकता है। कटौतीकर्ता संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए जमा करने की तारीख से उस वित्तीय वर्ष के आखिर तक इन फॉर्म पर विचार करेगा।

 


आय का टैक्स रिटर्न 


मान लीजिए, कोई टैक्सपेयर अगस्त में फॉर्म जमा कर रहा है, तो (ब्याज आय पर टीडीएस कैसे बचाएं)अप्रैल-अगस्त की अवधि के लिए काटा गया टीडीएस सिर्फ आय का टैक्स रिटर्न प्रस्तुत होने के बाद ही वापस किया जाएगा। इससे टैक्स पैयर्स का पैसा अनावश्यक रूप से अटक जाएगा। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी इनकम पर टीडीएस नहीं काटा जाए,फॉर्म पहले से ही जमा कर देने में समझदारी है।