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SEBI Investment Advisors Rules : सेबी ने इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स पर कसा शिकंजा, हर छह महीने के बाद देनी होगी सारी रिपोर्ट

SEBI New Guidelines : मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के लिए एक नया नियम लागु कर दिया है। अपने नियम में संशोधन (SEBI latest update) करते हुए सेबी ने कहा कि अगर कर्मचारियों की ओर से कोई भी भ्रष्ट गतिविधि की जाती है तो उनसे ही उस भ्रष्ट गतिविधि की भरपाई भी की जाएगी।
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SEBI Investment Advisors Rules : सेबी ने इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स पर कसा शिकंजा, हर छह महीने के बाद देनी होगी सारी रिपोर्ट

HBN News Hindi (ब्यूरो)  :  बाजार नियामक सेबी ने इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सारी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी समय-समय (SEBI investment advisors rules) पर देने के लिए कहा गया। पहले इन्हें साल में सिर्फ एक बार ही रीपोर्ट देनी होती थी और अब नए नियम के अनुसार इन्हें हर छह महीने के बाद रिपोर्ट को जमा करवाना होगा। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से।

 


जारी किया फॉर्मेट 


मार्केट रेगुलेटर SEBI ने बुधवार को निवेश सलाहकारों (SEBI social media rules) के लिए समयबद्ध रिपोर्टिंग (periodic reporting) का एक फॉर्मेट जारी किया। इसमें सलाहकारों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के बारे में भी बताने को कहा गया है। इसमें बताया गया है कि सलाहकारों को फेसबुक, ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी के (stock market latest news) बारे में साल में दो बार डिटेल देनी होगी।

 

सेबी के नए फॉर्मेट के तहत उन्हें अपने सोशल मीडिया हैंडल, अडवाजरी (SEBI Investment Advisors New Rules) चार्ज लेने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक अकाउंट, NISM सर्टिफिकेशन की डिटेल, सेबी या Investment Advisory Governance and Supervision Body (IAASB) द्वारा किए गए पिछले निरीक्षण के बारे में जानकारी, आधे साल में जारी किए गए (what is SEBI) विज्ञापनों का ब्योरा देना होगा।


ऐसा न करने पर हो सकती है कार्यवाही


हालांकि, सेबी खुद सोशल मीडिया पर निवेश सलाहकारों की (SEBI Social Media ke New Rules Kya H) गतिविधियों पर नजर रखता है। लेकिन, अब उसने सोशल मीडिया पर गतिविधियों के डिसक्लोजर को अनिवार्य बना दिया है। ऐसा नहीं करने वाले निवेश सलाहकारों के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है। फिलहाल IAASB adhoc basis पर इनसे जानकारी मांगता है।

सेबी ने कहा है कि निवेश सलाहकारों को अपने खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतों के बारे में भी (SEBI New Guidelines ) जानकारी देनी होगी। इन्हें प्रत्येक वित्त वर्ष में 30 सितंबर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली छमाही के लिए समय-समय पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

बढ़ा दी सेटलमेट स्कीम की अवधि 


अपने नियम में संशोधन करते हुए सेबी ने कहा कि अगर (SEBI Latest Update) कर्मचारियों की ओर से कोई भी भ्रष्ट गतिविधि सामने आती है तो उनसे ही इसकी भरपाई की जाएगी। यह भरपाई कर्मचारियों के वेतन और उन्हें मिलने वाली अन्य रकम से की जा सकती है। सेबी के अनुसार, किसी कर्मचारी के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के पेंडिंग रहने के दौरान संबंधित कर्मचारी को मिलने वाली ग्रैच्यूटी (SEBI Action against fraud adviser) को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से रोका जा सकता है।

वहीं, सेबी ने बुधवार को 2014 और 2015 में बीएसई पर स्टॉक (SEBI full form) ऑप्शन सेगमेंट में रिवर्सल ट्रेडों में शामिल संस्थाओं के लिए सेटलमेट स्कीम की अवधि 10 जून तक बढ़ा दी है। बता दें कि सेटलमेंट स्कीम 11 मार्च को शुरू हुई थी और 10 मई को समाप्त होने वाली थी।