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Money Planning : बच्चों को बनाना चाहते हैं फाइनेंशियल स्ट्रांग, ऐसे करें सेविंग की प्लानिंग

Financial Planning : घर में जल्द ही नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंजने वाली हैं? स्वागत की इन तैयारियों के साथ-साथ छोटे बच्चे के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planner) करना भी बहुत ही आवश्यक है।  ताकि उसकी मुस्कुराहटों से घर सदा खिला रहे और आप बिना किसी परेशानी के अपने छोटे (sarkari yojna for Child) बच्चे के साथ हंस-खेल सकें।  आइए इसके बारे में कुछ बातचीत करते हैं।
 
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Money Planning : बच्चों को बनाना चाहते हैं फाइनेंशियल स्ट्रांग, ऐसे करें सेविंग की प्लानिंग

HBN News Hindi (ब्यूरो) : पैरेंटस् अपने बच्चों के लिए सिर्फ तात्कालिक जरूरतों पर ही ध्यान देते हैं और इनमें से (Financial planning for Child) कुछ ही पैरेंटस् है जो की बच्चों के लिए लंबे समय के बारे में सोचतें है। । तात्कालिक जरूरतें जैसे कि उसके स्वाशथ्य का ध्यान रखना उसकी जरूरत के सभी सामान खरीदना लेते है। लेकिन आज हम आपको अपने बच्चों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग (Child insurance plan) कैसे करते है, वो सब बताएंगे। आइए जानतें हैं इस खबर के माध्यम से। 

 


निवेश को देते हैं प्राथमिकता 


दरअसल, यह सिर्फ मिश्राजी की सोच नहीं है, हमारे देश में ज्यादातर लोग आज भी सुरक्षित निवेश (Health insurance plan for child) को पहली प्राथमिकता देते हैं। भले ही उन्हें कम ब्याज मिले लेकिन मूल रकम को लेकर वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। 
हालांकि, मिश्राजी को रिटायरमेंट की (Bacho ke bhvisyh ke liye planing kaise kre
) भी चिंता है।  वे चाहते हैं कि 60 साल की उम्र तक आते-आते उनके पास इतना पैसा हो जाए कि वे बुढ़ापे का सामना आसानी से कर सकें। फिलहाल उनके पास निवेश का एकमात्र विकल्प एफडी ही है।

 


क्योंकि वे म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट में पैसा लगाना ही नहीं चाहते तो फिर क्या विकल्प बचता है, जिसमें जोखिम कम हो और (financial planning india) रिटर्न भी मनमुताबिक हो, ताकि उचित रिटायरमेंट फंड की व्यवस्था हो सके। 


रियल एस्टेट एक बेहतरीन विकल्प 


ऐसे लोगों के लिए रियल एस्टेट एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। वैसे भी, भारत में ज़मीन में निवेश (SIP for Child) करना अभी भी पैसा कमाने का सबसे अच्छा तरीका है। पिछले 4 दशकों के आंकड़े बताते हैं कि बैंक एफडी या अन्य बचत योजनाओं की तुलना में रियल एस्टेट में बेहतर पैसा कमाया गया है। अब मुद्दे पर आते हैं, अब मिश्राजी को क्या करना चाहिए?


मान लीजिए कि वर्तमान में मिश्राजी 40 साल के हैं, और उनके पास (sarkari yojna for Child) पहले से ही एक घर है, जिसकी ईएमआई चल रही है। लेकिन 20 साल बाद यानी 60 साल की उम्र में उन्हें रिटायरमेंट फंड के तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये की जरूरत होती है।  अब हम आपको बताते हैं कि दूसरा भाव मिश्राजी के रिटायरमेंट की टेंशन को पेंशन में कैसे बदलेगा। अगर मिश्राजी अभी अपनी बचत निवेश करके दूसरा घर या जमीन खरीदते हैं, तो उन्हें 60 साल बाद अपने रिटायरमेंट फंड के बारे में नहीं सोचना पड़ेगा। 20 साल बाद दूसरे घर की कीमत इतनी हो जाएगी कि वे (बच्चों के भविष्य की रचनाएँ) उसे बेचकर बुढ़ापे में आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकेंगे।


इसका मतलब यह है कि दूसरा घर उन लोगों के (सुकन्या समृद्धि योजना) लिए बेहतर सेवानिवृत्ति विकल्प हो सकता है जो अपनी मेहनत की कमाई को शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं करना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि इस फॉर्मूले से मिश्राजी 20 साल बाद कैसे 2 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं और इसके लिए उन्हें अब क्या करना होगा।


घर या जमीन खरीदेंगे 


सबसे पहली बात तो यह कि अब अगर मिश्राजी कोई घर या जमीन खरीदेंगे तो वह (बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना) भौतिक संपत्ति के रूप में होगी, यानी वह इसे कभी भी भुना सकते हैं। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि दूसरा घर खरीदने के लिए पैसे कहां से आएंगे? मासिक ईएमआई का भुगतान कैसे होगा? क्योंकि उनकी पहले से ही होम लोन की ईएमआई चल रही है। 


फिलहाल फैसला लेना थोड़ा (Best Investment Options) मुश्किल होगा, लेकिन 20 साल बाद उन्हें पछताना नहीं पड़ेगा। मिश्राजी ही नहीं, हर नौकरीपेशा व्यक्ति को सबसे पहले यह तय करना होगा कि 60 साल की उम्र में उसे कितने पैसों की जरूरत होगी। आपको उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।


दूसरा घर खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि (बाल बीमा योजना) वह पुराना न हो, जमीन खरीदना फ्लैट से ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है। लेकिन जमीन उन क्षेत्रों में खरीदें जहां भविष्य में विस्तार की संभावना हो। यानी शहर से थोड़ा दूर खरीदें। लेकिन जान लें कि आने वाले सालों में उस क्षेत्र का भी विकास होगा, जिससे इसकी कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना रहेगी।

 


खर्च निकले के बाद सैलरी का 20% बचे 


दूसरा घर खरीदने का फैसला तभी लें जब आप सारे खर्च (Best planing for buying Home) निकालने के बाद सैलरी का 20% बचाने में सक्षम हों। उदाहरण के तौर पर अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है और आप हर महीने 20 हजार रुपये बचा रहे हैं, तभी घर खरीदने के बारे में सोचें।  इसके अलावा अगर आपके पास पहले से रकम बचती है तो आप इसका इस्तेमाल डाउन पेमेंट के लिए कर सकते हैं।


अगर आपके पास कहीं एफडी है तो आप इसका इस्तेमाल घर खरीदने में कर सकते हैं।  शुरुआत में घर की अधिकतम कीमत चुकाने (Sukanya samridhi yojna) की कोशिश करें। आप जितना कम कर्ज लेंगे उतना अच्छा रहेगा।  यदि भूमि उपलब्ध है, तो यह सेवानिवृत्ति के लिए सबसे अच्छा निवेश हो सकता है। लेकिन जमीन खरीदने के लिए एकमुश्त रकम की जरूरत होगी।  जिसके लिए आप एफडी समेत अन्य बचत का इस्तेमाल कर सकते हैं।  क्योंकि जमीन की कीमत फ्लैट की तुलना में तेजी से बढ़ती है। 


इतना ही नहीं आप जमीन का एक टुकड़ा 10 से 30 लाख रुपये तक (best investment option) में खरीद सकते हैं।  लेकिन फ्लैट खरीदने के लिए कम से कम 50 लाख रुपये की जरूरत होगी, क्योंकि इससे कम कीमत में अच्छी लोकेशन पर फ्लैट मिलने की संभावना कम है।  छोटे शहरों में भी 20 से 30 लाख रुपये में फ्लैट मिल जायेंगे।  लेकिन अगर आप निवेश के नजरिए से खरीद रहे हैं, तो आपको ऐसे क्षेत्र में एक फ्लैट ढूंढने का प्रयास करना चाहिए जहां इसे आसानी से किराए पर लिया जा सके या जब चाहें तब बेचा जा सके। साथ ही उस इलाके में प्रॉपर्टी की कीमत कम से कम 5 से 7 साल में दोगुनी होनी चाहिए।