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Loan News : अब लोन देने से पहले यह करने जा रहे बैंक, जानिये RBI का खास अपडेट

Bank News : आमतौर पर जब भी लोन लेने के लिए हम बैंक में जाते हैं तो वहां बैंक मैनेजर या अन्य अधिकारी से इस बारे में पता करते हैं। लोन के बारे में कई बार लिखित में शर्तें पढ़ने को मिलती हैं तो बैंक की शब्दावली पढ़कर चकरा जाते हैं। अनेक शब्दों का अर्थ ही नहीं समझ आता। ऐसे में अब RBI ने बैंकों को गाइडलाइन (guidelines to banks)जारी की है कि वे स्पष्ट व सही से लोन की शर्तों आदि के बारे में बताएंगे।

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Loan News : अब लोन देने से पहले यह करने जा रहे बैंक, जानिये RBI का खास अपडेट

HBN News Hindi (ब्यूरो) : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को सभी बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (housing finance companies)को निर्देश दिया कि वे लोन लेने वाले संभावित ग्राहकों को उस लोन और ब्याज के बारे में सरल शब्दों में 'मुख्य तथ्यों का विवरण' (Statement of Key Facts) प्रदान करें, जिनका भुगतान करने की अपेक्षा उनसे की जाती है ताकि उन्हें निर्णय लेने में मदद मिल सके। ग्राहकों को बैंकिंग के तकनीकी शब्दों के जाल से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक ने यह पहल की है।

 

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ग्राहक से पावती भी ली जाएगी


RBI Guideline For Banks : निर्देश में कहा गया है कि बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों जैसी सभी संस्थाओं को RBI द्वारा दिए गए स्टैंडर्ड प्रारूप के अनुसार, लोन अनुबंध निष्पादित करने से पहले सभी संभावित उधारकर्ताओं को केएफएस (KFS)प्रदान करना होगा। आरबीआई ने कहा, "केएफएस ऐसे ग्राहकों द्वारा समझी जाने वाली भाषा में लिखा जाएगा। इसके कंटेंट को उधारकर्ता को समझाया जाएगा और एक पावती प्राप्त की जाएगी कि उसने इसे समझ लिया है।"

 

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इनमें सामंजस्य स्थापित करने का निर्णय 


आरबीआई के निर्देश में कहा गया है कि केएफएस को एक यूनीक प्रोपोजल (unique proposal) नंबर प्रदान किया जाएगा और सात दिन या उससे अधिक की अवधि वाले ऋणों के लिए कम से कम तीन कार्य दिवसों की वैधता अवधि होगी। सात दिन से कम अवधि वाले ऋणों के लिए एक कार्य दिवस की वैधता अवधि होगी। आरबीआई ने केएफएस पर सभी निर्देशों और वार्षिक प्रतिशत दर (एपीआर) के प्रकटीकरण में सामंजस्य स्थापित करने का निर्णय लिया है।

 

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यह है मकसद


यह पारदर्शिता बढ़ाने और विभिन्न विनियमित संस्थाओं द्वारा पेश किए जा रहे वित्तीय उत्पादों पर सूचना विषमता को कम करने के लिए किया जा रहा है, जिससे उधारकर्ताओं को सूचित वित्तीय निर्णय (financial decisions) लेने में सशक्त बनाया जा सके। सामंजस्यपूर्ण निर्देश सभी विनियमित संस्थाओं, जैसे बैंकों और आवास वित्त कंपनियों द्वारा विस्तारित सभी खुदरा और एमएसएमई सावधि ऋण उत्पादों पर लागू होंगे।

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