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इस Bank के ग्राहकों को महंगा हो सकता है लोन, MCLR के कारण बढ़े रेट

Bank News : नवीनतम वित्त वर्ष में काफी वित्तीय बदलाव हुए हैं। 2024-2025 वित्त वर्ष का पहला महीना ही चल रहा है और बैंको में ब्याज दरों में भी बदलाव करना शुरु कर दिया हैं। यही कारण है कि हाल ही में हमें पता चला है कि एक सरकारी बैंक ने MCLR दरों में बढोतरी कर दी हैं, जिसका सीधा अर्थ है कि अब लोन लेना महंगा हो सकता है। आइए जानते हैं इस बैंक के बारे में खबर के माध्यम से ।

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इस Bank के ग्राहकों को महंगा हो सकता है लोन, MCLR के कारण बढ़े रेट 


HBN News Hindi (ब्यूरो) : अगर आप भी लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी साबित हो सकती हैं ।एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सरकारी बैंक MCLR में 0.05 से 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा। बैंक ने कहा कि MCLR दरों में 15 अप्रैल से बढ़ोतरी होगी। ध्यान दें कि MCLR की दरों में गिरावट (MCLR rates fall) देखी जा सकती है जिससे नीचे बैंक को लोन नहीं दे सकेगा । यानी यह बैंक लोन की सबसे कम दर है आइए जानते हैं पूरी अपडेट के बारे में खबर में।

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एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सरकारी बैंक MCLR में 0.05 से 0.10 फीसदी तक की बढ़ोतरी करेगी। बैंक ने कहा कि सोमवार से MCLR दरों में बढ़ोतरी होगी। बता दें कि MCLR वह न्यूनतम दर है जिसके नीचे बैंक को लोन देने की अनुमति नहीं है। यानी की यह बैंक की लोन देने की न्यूनतम दर है।

इतनी होगी ब्याज दर


बता दें कि IOB के अनुसार, ओवरनाइट एमसीएलआर 8.05 फीसदी है, जो पहले 8 फीसदी था। एक महीने के MCLR 5 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 8.25 हो गया, जो पहले 8.20 फीसदी थी। वहीं, 3 महीने की एमसीएलआर अब 8.45 फीसदी है जो पहले 8.40 फीसदी था। छह महीने की एमसीएलआर 8.70 फीसदी है जो पहले 8.65 फीसदी थी। 

MCLR में इतनी हुई बढोतरी


वहीं 1 साल की  MCLR 8.85 फीसदी है जो पहले 8.80 फीसदी था। जबकि दो साल की एमसीएलआर अब 8.85 फीसदी है जो पहले 8.80 फीसदी था। 3 साल की एमसीएलआऱ (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में 10 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। अब एमसीएलआर 8.85 फीसदी से बढ़कर 8.95 फीसदी हो गया।

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जानें MCLR के बारे में

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate। यह वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है। 

इन कारणो से होती हैं बढोतरी

यानी कि इस रेट के नीचे बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकते, और ये जितना बढ़ेगा, लोन पर ब्याज भी उतना ही ऊपर जाएगा। बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने, एक साल और दो साल का एमसीएलआर घोषित करना अनिवार्य होता है।

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इतनी हो सकती है लोन पर ब्याज दरें 

अब MCLR बढ़ने का मतलब है कि मार्जिनल कॉस्ट (Marginal cost) से जुड़े लोन जैसे- होम लोन (home loan), व्हीकल लोन (vehicle loan) पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी। लेकिन ये ध्यान रखें कि MCLR रेट बढ़ने पर लोन पर ब्याज दरें तुरंत नहीं बढ़ती हैं। लोन लेने वालों की EMI रीसेट डेट पर ही आगे बढ़ती है।