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MCLR में बढोतरी के कारण लोन के ब्याज दरों ने छुआ आसमान

Bank Loan: अगर आप भी होम लोन या पर्शनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि आरबीआई ने पिछली बैठक में किसी तरह का कोई बदलाव न करने के कारण MCLR में भारी बढोतरी देखने को मिली जिससे बैंक लोन के ब्याज दरों  में जमकर उछाल देखने को मिला हैं आइए जानते हैं आज के ताजे ब्याज दर के बारे में विस्तार से।
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MCLR में बढोतरी के कारण लोन के ब्याज दरों ने छुआ आसमान

HBN News Hindi (ब्यूरो) : आजकल हर कोई फाईनेंशियल समस्याओं का सामना (facing financial problems) करने के लिए लोन सुविधा का प्रयोग करते हैं लेकिन ताजे अपडेट के अनुसार आपको बता दें कि पिछले नियमों में परिवर्तन न होने के कारण अब MCLR 0.5 फीसदी बढ गया है जिससे लोन की ब्याज के दरों में भारी बढोतरी देखने को मिली आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल से।
 

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इन कारणो से बढा MCLR


सरकारी बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक (Indian Overseas Bank) के ग्राहकों के लिए बड़ा झटका है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने मार्जिन कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी MCLR में बढ़ोतरी की घोषणा की है। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, सरकारी बैंक MCLR में 0।05 से 0।10 फीसदी तक की बढ़ोतरी करेगी। बैंक ने कहा MCLR दरों में बढ़ोतरी होगी। बता दें कि MCLR वह न्यूनतम दर है जिसके नीचे बैंक को लोन देने की अनुमति नहीं है। यानी की यह बैंक की लोन देने की न्यूनतम दर है।


 

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इस बारे में भी जानना बेहद जरूरी 

 

IOB के मुताबिक, ओवरनाइट एमसीएलआर 8।05 फीसदी है, जो पहले 8 फीसदी था। एक महीने के MCLR 5 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 8।25 हो गया, जो पहले 8।20 फीसदी थी। वहीं, 3 महीने की एमसीएलआर अब 8.45 फीसदी है जो पहले 8.40 फीसदी था। छह महीने की एमसीएलआर 8।70 फीसदी है जो पहले 8।65 फीसदी थी। वहीं एक साल की एमसीएलआर 8।85 फीसदी है जो पहले 8।80 फीसदी था। जबकि दो साल की एमसीएलआर अब 8।85 फीसदी है जो पहले 8।80 फीसदी था। 3 साल की एमसीएलआऱ में 10 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। अब एमसीएलआर 8।85 फीसदी से बढ़कर 8।95 फीसदी हो गया।

 

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जानें MCLR के बारे में विस्तार से 

 

MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate। यह वह न्यूनतम दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है। यानी कि इस रेट के नीचे बैंक ग्राहकों को लोन नहीं दे सकते, और ये जितना बढ़ेगा, लोन पर ब्याज भी उतना ही ऊपर जाएगा। बैंकों के लिए हर महीने अपना ओवरनाइट, एक महीने, तीन महीने, छह महीने, एक साल और दो साल का एमसीएलआर घोषित करना अनिवार्य होता है।

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ताजे लोन के दामों में हुई इतनी बढोतरी


MCLR बढ़ने का मतलब है कि मार्जिनल कॉस्ट से जुड़े लोन जैसे- होम लोन, व्हीकल लोन पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी। लेकिन ये ध्यान रखें कि MCLR रेट बढ़ने पर लोन पर ब्याज दरें तुरंत नहीं बढ़ती हैं। लोन लेने वालों की EMI रीसेट डेट पर ही आगे बढ़ती है।