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Loan की EMI घटने के नहीं आसार, महंगाई से ही थोड़ी राहत मिलने की संभावना

Loan EMI News : फिलहाल लोन की EMI की दरें घटने के आसार नहीं हैं। मार्च महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोर मुद्रास्फीति जरूर घटी है। हालांकि इस वित्त वर्ष में महंगाई से राहत (relief from inflation) मिलने के आसार हैं। बता दें कि लोन की ईएमआई घटने का लोग इंतजार कर रहे हैं। आइये जानते हैं इस बारे में विस्तार से इस खबर के माध्यम से।

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Loan की EMI घटने के नहीं आसार, महंगाई से ही थोड़ी राहत मिलने की संभावना

HBN News Hindi (ब्यूरो) : होम, कार लोन समेत तमाम तरह के लोन लिए लोग लंबे समय से अपनी EMI  होने का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह बुरी खबर है। अभी जल्द उनके ईएमआई का बोझ कम नहीं होने वाला है। दरअसल, मार्च में खुदरा महंगाई (retail inflation) घटकर दस महीने के निचले स्तर 4.85 प्रतिशत पर आ गई। 

 

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इससे पहले फरवरी में खुदरा महंगाई (retail inflation) 5.09 प्रतिशत और जनवरी में 5.1 प्रतिशत थी। इसके बावजूद Home-Car Loan की EMI चुका रहे लोगों को जल्द राहत मिलने वाली नहीं है। बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि भू-राजनैतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी समेत बढ़ते वैश्विक जोखिमों के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक (reserve Bank of India) नीतिगत दरों में कटौती में देरी कर सकता है।


दरों की कटौती में इस कारण हो सकती है और देरी 


कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities)ने कहा कि हम मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में दरों में आधा फीसदी की कटौती की अपनी अपील पर कायम हैं। इसके बावजूद हमें लगता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दरों में कटौती के चक्र में देरी और ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) के कारण आरबीआई की दरों में कटौती में और देरी हो सकती है।

 

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 ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि निकट भविष्य में बढ़ती महंगाई के कारण खाद्य महंगाई में तेजी (rise in food inflation), भू-राजनैतिक जोखिमों और ओपेक प्लस देशों के आपूर्ति में कटौती करने से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और गैर-ऊर्जा वस्तुओं की ऊंची कीमतों के कारण वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में औसत खुदरा महंगाई के पांच प्रतिशत से ऊपर रहने का जोखिम है। जैसा कि RBI Governorने भी कहा है, ये जोखिम मुद्रास्फीति कम करने के अंतिम पड़ाव पर चुनौती बन सकते हैं।"

 

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मुद्रास्फीति और IIP Data थे उम्मीदों के अनुरूप 


ब्रोकरेज ने कहा कि हम ओवरऑल मुद्रास्फीति में केवल धीरे-धीरे नरमी की उम्मीद करते हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि मुद्रास्फीति और आईआईपी डेटा उम्मीदों के अनुरूप थे, जिसका मौद्रिक राजकोषीय नीति (monetary fiscal policy) पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले साल खुदरा महंगाई दर औसतन 4.5 प्रतिशत रहेगी। हमारे विचार में, दर में कटौती केवल वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में हो सकती है।