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Income Tax Rules : इससे ज्यादा कैश निकालने पर इनकम टैक्स को देनी होगी डिटेल, नहीं तो मिल जाएगा नोटिस

Income Tax Rules: अपडेटिड सूचना के अनुसार आपको बता दें कि आयकर विभाग ने अपने नियमों में भारी बदलाव कर दिए हैं जिसके अनुसार बता दें कि आयकर विभाग ने साफ जाहिर कर दिया है कि अगर आप अपने खाते से इससे ज्यादा कैश विड्रोल करते हैं तो आपको भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल से।
 
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Income Tax Rules : इससे ज्यादा कैश निकालने पर इनकम टैक्स को देनी होगी डिटेल, नहीं तो मिल जाएगा इनकम टैक्स नोटिस

HBN News Hindi (ब्यूरो) : आज के समय में हर कोई अपना पैसा बैंक में रखना पसंद करता है। मगर आपको बता दें कि इससे ज्यादा कैश निकालने पर आपको भारी पेनल्टी का भुगतान (payment of heavy penalty) करना पड़ सकता है। इसके लिए आपको बैंक नोटिस के साथ-साथ इनकम टैक्स नोटिस (income tax notice) भी भेजा जा सकता है। अगर आप भी इस नोटिस की अवहेल्ना करते हैं तो आयकर विभाग आपके खिलाफ सख्त कार्यवाही कर सकती है। आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल में।
 

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सेविंग अकाउंट से पैसे निकालने के संदर्भ में नए नियम

 

 देश में तमाम लोगों के सेविंग्स अकाउंट (Saving Account) होते हैं। ऐसे ग्रहकों को यह जान लेना बेहद जरूरी है कि उनके अकाउंट में पड़े बैलेंस में कितने पर टैक्स लगता है कितने पर नहीं। दरअसल बैंक की तरफ से सेविंग अकाउंट पर सालाना ब्याज (Annual Interest) दिया जाता है, लेकिन सभी बैंक की अलग-अलग ब्याज दर होती है। वहीं कुछ ग्राहक यह नहीं जानते कि एक फाइनेंशियल ईयर में आप सेविंग अकाउंट में कितना पैसा डाल या निकाल सकते है, जिससे आप टैक्स के दायरे में ना आए?

 

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 इससे ज्यादा जमा कराने पर इतना देना होगा टैक्स


बता दें बैंक कंपनियों को हर साल टैक्स डिपार्टमेंट (Tax Department) को बैंक से ग्राहकों द्वारा 10 लाख या उससे अधिक अमाउंट निकालने पर जवाब देना होता है। टैक्स कानून के तहत बैंक को करंट फाइनेंशियल ईयर के दौरान उन अकाउंट्स की जानकारी देनी होती है। यह लिमिट करदाता के एक या एक से अधिक खातों (चालू खातों के अतिरिक्त व टाइम डिपॉजिट) में फाइनेंशियल ईयर में दस लाख रुपये या उससे अधिक कैश जमा के लिए समग्र रूप से देखी जाती है।

 

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अब इतना करवा सकते हैं एक बार में जमा

करंट अकाउंट में कैश डिपॉजिट की सीमा 50 हज़ार रुपए या उससे अधिक है। लेनेदेन की बात करें, तो होस्टबुक लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष कपिल राणा कहते हैं कि एक व्यक्ति को खातें से किए जाने वाले आय व्यय को लेकर इनकम टैक्स के नियम 114E के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इससे वह एक फाइनेंशियल ईयर (Financial year) में अपने सेविंग अकाउंट से उतना ही पैसा निकाले या जमा करे जिससे वो आयकर की रडार में ना आए।


इस एक्ट के तहत लागु होंगे नियम


बैंक चाहे प्राइवेट हो या फिर सरकारी, जो भी ग्राहकों को अकाउंट खोलने की सुविधा देता। उन बैंक के ऊपर  बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949(Banking Regulation Act 1949) लागू होता है। ऐसे बैंकों को अकाउंट ट्रांसजेक्शन की रिपोर्ट देना जरूरी होता है। खासकर की करंट और टाइम डिपॉजिट वाले अकाउंट्स को छोड़कर उन खातों में फाइनेंशियल ईयर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा किया जाता है।

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वहीं पेमेंट या सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 की धारा 18 के तहत RBI द्वारा जारी किए गए बैंक ड्राफ्ट (Bank Draft), पे ऑडर (Pay Order), बैंकर चैक (Banker Cheque), प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स (Prepaid Instrument) की खरीद के लिए एक फाइनेंशियल ईयर में नकद एकत्रीकरण में 10 लाख या उससे अधिक पेमेंट की गई हो।

इस तरह करें क्रेडिट कार्ड का भुगतान


जो बैंक ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड सर्विस देता है और उस पर भी  (Banking Regulation Act 1949) लागू होता है या किसी और कंपनी-संस्था को अकाउंट ट्रांसजेक्शन की रिपोर्ट देना जरूरी होता है।

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इससे ज्यादा का न करें कैश पेमेंट


एक या दो से ज्यादा जिनके पास क्रेडिट कार्ड (Credit Card) होते हैं और उन्हें बिल के विरूध एक फाइनेंशियल ईयर में एक लाख या उससे अधिक का कैश भुगतान (cash payment) करना होगा। साथ ही बिल के विरूध किसी भी मोड से 10 लाख या उससे अधिक की पेमेंट करनी होगी।