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EMI Update : लोन लेने से पहले जान लें ये अपडेट वर्ना पड़ जाएगा पछताना

EMI Update: अगर आप भी लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि करंट फाइनेंसियल इयर के शुरूआत रेपो रेट में कोई हलचल नहीं हुई। अगर आप भी लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि MPC में भारी बढोतरी के कारण लोन लेने वालों को भारी चार्ज के साथ साथ अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा आइए जानते हैं इस खबर में विस्तार से।
 
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EMI Update  : लोन लेने से पहले जान लें ये अपडेट वर्ना पड़ जाएगा पछताना 

HBN News Hindi (ब्यूरो) : आज के समय में हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर और गाड़ी (house and car) हो जिसके लिए वह लोन का सहारा लेता हैं लेकिन आपको बता दें अगर आप अभी लोन लेने का प्रयास (Attempt to take loan) करते हैं या लोन लेते हैं तो आपको भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं इन कपंनियों के बारे में डिटेल से ।

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अगर आप ये सोच रहे हैं तो कि इस साल के अंत तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ब्याज (Reserve Bank of India interest) दरों में कटौती करने की तैयारी कर रही है। तो भूल जाइए। जो रिपोर्ट सामने निकल आ रही है वो ये है कि मौजूदा साल तो क्या करंट फाइनेंशियल ईयर में भी आरबीआई ब्याज दरों में कटौती नहीं करने जा रहा है।

 

चालू वित्तीय वर्ष में ब्याज दरें 


मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी डायरेक्शन (Policy Direction of the US Federal Reserve) में बदलाव को देखते हुए रिजर्व बैंक चालू वित्तीय वर्ष में ब्याज दरें कम करने की संभावना नहीं है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मोगर्न स्टेनली ऐसा क्यों कह रहा है?

 

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महंगाई दर 4 फीसदी के टारगेट 


मॉर्गन स्टेनली की इकोनॉमिस्ट उपासना चाचरा और बानी गंभीर ने मंगलवार अपने एक नोट में कहा कि हमारा मानना है कि प्रोडक्टीविटी ग्रोथ में सुधार, इंवेस्टमेंट रेट में इजाफा लगातार देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी फेड भी अभी ब्याज दरों में कटौती नहीं करने जा रहा है। साथ ही आने वाले महीने में महंगाई दर 4 फीसदी के टारगेट से ऊपर रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि ब्याज दरों के भी हाई रहने की उम्मीद है।

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 बेसिस प्वाइंट का इजाफा 


दोनों इकोनॉमिस्ट (both economists) ने उम्मीद जताई है कि​ वित्त वर्ष 2025 में पॉलिसी रेट में राहत की कोई संभावना नहीं है। उनका अनुमान है कि आरबीआई अपने रेपो रेट को 6।5 फीसदी पर स्टेबल रखेगा। 5 अप्रैल को, आरबीआई की एमपीसी ने लगातार सातवीं बैठक में रेपो दर (repo rate in the seventh meeting) में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने मई 2022 से फरवरी 2023 के बीच रेपो रेट को कुल 250 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया था। जिसके बाद बाद रेपो रेट 6।50 फीसदी हो गया था।


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अमेरिका में पहला रेट कट के बारे में अपडेट


वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेड रिजर्व भी अपनी पॉलिसी ​रेट की दिशा में बदलाव (Change in policy rate direction)कर रहा है। पहले कहा जा रहा था कि जून के महीने में ब्याज दरों में कटौती देखने को मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं होने जा रहा है। अमेरिका में पहला रेट कट जुलाई में देखने को मिल सकता है।
 

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बेसिस प्वाइंट रेट कट का टारगेट 


पहले ये कहा गया था कि साल भर में 4 रेट कट होंगे, लेकिन इसे घटाकर अब तीन कर दिया गया है। वहीं अमेरिकी फेड ने साल 2025 में 300 बेसिस प्वाइंट रेट (basis point rate) कट का टारगेट रखा था। जिसे कम कर 1।75 फीसदी कर दिया है। इन तमाम बातों का यही मतलब है कि फेड रिजर्व भी महंगाई से ले​कर जियो पॉलिटिकल टेंशन को लंबे समय तक के लिए महसूस कर रहा है।


 

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इंपोर्टिड सामानों के बारे में अपडेट


मॉर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वास्तव में, अमेरिकी डॉलर में मजबूती (strength in US dollar) के साथ हाई फेड रेट की वजह से आरबीआई सतर्क रुख अपना सकता है। विश्लेषकों ने कहा कि कैपेक्स और प्रोडक्टीविटी की वजह से मजबूत होता ग्रोथ रेट इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि ब्याज दरें लंबे समय तक के लिए हाई रह सकती है। मॉर्गन स्टेनली  (Morgan Stanley) के अनुसार, डॉलर में मजबूती से रुपए पर अधिक असर देखने को मिल सकता है। इंपोर्टिड सामानों के महंगे होने का अनुमान है।