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Anil Ambani के हाथ से फिसल गई बड़ी डील, 4000 करोड़ रुपये का नुकसान

Anil Ambani Update: देश के सबसे बड़े उद्यमी मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी के दिन सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्हें एक बड़ी डील मिला था। जिससे उन्हें लगभग 4000 करोड़ का बेनिफिट मिलने के आसार थे। लेकिन आपको बतादें कि अनिल अंबानी की ये डील भी उनके हाथों से निकल गई है। आइए जानते हैं अनिल अंबानी की इस डील के बारे में।
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Anil Ambani के हाथ से फिसल गई बड़ी डील, 4000 करोड़ रुपये का नुकसान

HBN News Hindi (ब्यूरो) : लगातार मेहनत के बाद भी अनिल अंबानी के दिन सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। जी हां आपको बता दें कि भारी कर्ज में डूबे अनिल अंबानी को 4,000 करोड़ रुपये (Anil Ambani update) का चेक मिलने वाला था। लेकिन ये डील भी उनके हाथों से निकलते दिखाई दे रही है। अनिल अंबानी (Anil Ambani news) के हाथों से एक बार फिर से बड़ी डील फिसल गई है। जिससे वह अपने पूराने से बाहर निकलने में असमर्थ हो रहे हैं। आइए जानते हैं इस अपडेट के बारे में डिटेल में।

 

 

अनिल अंबानी को के हाथ से निकला ये डील

इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infrastructure) के मालिक अनिल अंबानी (Anil Ambani)  की परेशानी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। अनिल अंबानी का बुरा वक्त खत्म ही नहीं हो रहा है। अनिल अंबानी के हाथों से एक बार फिर से बड़ी डील फिसल गई है। इस डील के फिसलने के साथ ही अनिल अंबानी के हाथों से 4000 करोड़ रुपये भी फिसल गया है।

 

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जानें किन कारणों से अटक गई ये डील

दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने अपने फैसले को लेकर यू-टर्न ले लिया है। सरकार के इस यू-टर्न के साथ ही अनिल अंबानी को बड़ा झटका (Big blow to Anil Ambani) लगा और 4000 करोड़ रुपये की डील अटक गई,  द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने इस डील से फिलहाल अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।

 

राज्स सरकार ने किन कारणों से किया निवेश से इंकार

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई मेट्रो वन में अनिल अंबानी की कंपनी की हिस्सेदारी खरीदने के सौदे को मंजूरी दे दी थी। सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद मुंबई मेट्रो वन में अनिल अंबानी की हिस्सेदारी बिकने का रास्ता साफ हो गया है। इस डील से अनिल अंबानी करीब 4000 करोड़ रुपये मिलने वाले थे। लेकिन अब इस डील में नया ट्वीस्ट आ गया है।  राज्स सरकार ने यू-टर्न लेते हुए अपने ही फैसले को बदल दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने 4 महीने पहले ही मुंबई मेट्रो वन में अनिल अंबानी की कंपनी की 74 फीसदी हिस्सेदारी (Anil Ambani's company has 74% stake in Mumbai Metro One) खरीदने की हामी भरी थी, लेकिन अब सरकार ने अपना फैसला बदल दिया है।  


अब इतने को और झेलना होगा नुकसान


अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (RInfra) को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने अपना फैसला बदल दिया है। सरकार ने मुंबई मेट्रो वन ( Mumbai Metro One) में रिलायंस इंफ्रा की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के अपने फैसले को बदल दिया है। 4 महीने पहले सरकार ने प्राइवेट कंपनी की हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी थी, लेकिन अब सरकार ने यू-टर्न ले लिया है।

इस कंपनी के साथ होने वाली थी डील

बता दें कि मुंबई मेट्रो वन एक पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्ट है। इसमें सरकार और निजी सेक्टर दोनों की हिस्सेदारी है। मुंबई मेट्रो वन में सरकारी हिस्सेदारी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी MMRDA के जरिए है। इसके पास मुंबई मेट्रो वन में 26 फीसदी हिस्सेदारी (26% stake in Mumbai Metro One) है। वहीं अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रा के पास 74 फीसदी हिस्सेदारी है।इस हिस्सेदारी को सरकार खरीदने वाली थी, जिससे मुंबई मेट्रो वन पूरी तरह से सरकारी प्रोजेक्ट हो जाता।

सरकार अब इस कंपनी में करेगी निवेश

मुंबई मेट्रो वन मुंबई की पहली मेट्रो परियोजना है। साल 2007 में बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत इसका निर्माण हुआ था। जिसका परिचालन मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड ( MMOPL) नामक कंपनी करती है। MMOPL महाराष्ट्र सरकार की एमएमआरडीए और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Reliance Infrastructure Limited) की संयुक्त कंपनी है। सरकार अनिल अंबानी की हिस्सेदारी को 4000 करोड़ रुपये में खरीदने वाली थी, जिसे अब होल्ड कर दिया गया है।  सरकार इससे पीछे हट गई है।  

इन कारणों से सरकार पीछे किया पैर

सबसे अधिक भीड़- भाड़ वाली मेट्रो होने के बावजूद इसमें कई खामियों को लेकर ये परियोजना अक्सर विवादों में रही है। इतना ही नहीं एमएमआरडीए-रिलायंस इंफ्रा की संयुक्त उद्यम परियोजना के घाटे का दावा होता रहा है। इतना ही नहीं इस परियोजना की लागत को लेकर भी विवाद होता रहा है।  महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टियों और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (Chief Minister Prithviraj Chavan) ने सरकार के इस परियोजना में निजी कंपनी की हिस्सेदारी खरीदने की काफी आलोचना भी की।

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डील के पीछे ये था अनिल अंबानी का मकसद

विपक्ष सरकार पर  अनिल अंबानी समूह का पक्ष लेने का आरोप लगाती रही है।  ऐसे में सरकार विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती है। ऐसे में सरकार ने इस डील से पीछे हटने का फैसला किया, हालांकि सरकार के इस फैसले से अनिल अंबानी (anil loss a big deal) को बड़ा झटका लगा है।  इस डील से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल वो अपनी कंपनी के कर्ज के बोझ को कम करने में करने वाले थे, लेकिन फिलहाल इसपर पानी फिर गया है।