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Bank Loan : लोन के नियमों में आरबीआई ने किया भारी बदलाव, लोन लेना बन सकता है आर्थिक नुकसान का कारण

Bank Loan : अगर आप भी लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि आरबीआई के ताजे अपडेट के मुताबिक अब आपको लोन लेने के लिए ज्यादा पेमेंट का भुगतान करना पड़ेगा । इसका कारण दिन-प्रतिदिन लोन लेने के लिए बढ रहे डिमांड है आइए जानते हैं इन खर्चो के बारे में डिटेल से ।
 
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Bank Loan : लोन के नियमों में आरबीआई ने किया भारी बदलाव, लोन लेना बन सकता है आर्थिक नुकसान का कारण


HBN News Hindi (ब्यूरो) : आजकल हर कोई अपनी जरूरतो को पूरा करने के लिए लोन की तरफ भागता है अगर आप भी लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको बता दें कि आज के समय में लोन लेना आपको मंहगा (taking a loan is expensive for you) पड़ सकता है आइए जानते हैं इन लोनो पर लगने वाले चार्जिस (Loan charges update) के बारे में डिटेल से खबर में ।
 

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लोन लेने का प्लान इतना पड़ेगा मंहगा


अगर आप पर कोई लोन है या आप किसी काम के लिए लोन लेने का प्लान (loan taking plan) बना रहे हैं तो ये खबर आपके काम की है। दरअसल, अब बैंक ग्राहकों से लोन पर लगने वाले अलग-अलग चार्ज और फीस की जानकारी नहीं छुपा सकेंगे। उन्हें ग्राहकों को इन फीस और चार्जेज के बारे बताना होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ने बैंकों और एनबीएफसी को एक अक्टूबर से रिटेल और एमएसएमई लोन लेने वाले ग्राहकों को ब्याज और अन्य लागत समेत कर्ज के बारे में सभी तरह की जानकारी देनी होगी। इसके लिए RBI ने KFS यानी के फैक्ट स्टेटमेंट रूल बनाया है। आइए आपको आसान भाषा में समझाते हैं कि क्या है ये KFS…

 

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इन कारणों से लिया गया है ये फैसला


आरबीआई ने बयान में कहा कि कर्ज के लिए केएफएस पर निर्देशों (instructions on kfs) को सुसंगत बनाने का निर्णय लिया गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, आरबीआई के दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों के प्रोडक्ट्स को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने और सूचना की कमी को दूर करने के लिए किया गया है। इससे कर्ज लेने वाला सोच-विचारकर वित्तीय निर्णय कर सकेंगे। यह निर्देश आरबीआई के नियमन के दायरे में आने वाले सभी इकाइयों (आरई) की तरफ से दिए जाने वाले खुदरा और एमएसएमई टर्म लोन (Retail and MSME Term Loan)के मामलों में लागू होगा।

 

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इस संस्ता के द्वारा किया जाता है नियम लागू


केएफएस आसान भाषा में लोन एग्रीमेंट के मुख्य तथ्यों (Key facts of the loan agreement) की एक डिटेल है। यह कर्ज लेने वालों को एक मानकीकृत प्रारूप में प्रदान किया जाता है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक वित्तीय संस्थान दिशानिर्देशों को जल्द-से-जल्द लागू करने के लिए आवश्यक उपाय करेंगे। एक अक्टूबर, 2024 को या उसके बाद स्वीकृत सभी नए रिटेल और एमएसएमई टर्म लोन के मामले (MSME Term Loan Cases) में दिशानिर्देश के साथ पालन किया जाएगा। इसमें मौजूदा ग्राहकों को दिए गए नए कर्ज भी शामिल हैं।

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कर्ज लेने के लिए इन दस्तावेजों का किया जाता हैं प्रयोग


आरबीआई के मुताबिक, थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर की ओर से केंद्रीय बैंक के दायरे में आने वाले संस्थानों द्वारा कर्ज लेने वाले संस्थानों से वसूले गए बीमा और कानूनी शुल्क जैसी राशि भी वार्षिक प्रतिशत दर (APR) का हिस्सा होगी। इसके बारे में अलग से खुलासा किया जाना चाहिए। जहां भी आरई ऐसे शुल्कों की वसूली में शामिल है, उचित समय के भीतर प्रत्येक भुगतान के लिए कर्ज लेने वालों को प्राप्ति रसीदें और संबंधित दस्तावेज प्रदान किए जाएंगे।


 

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क्रेडिट कार्ड के नियमों में हुई ये बदलाव


इसके अलावा, ऐसा शुल्क जिसका जिक्र केएफएस (Fees mentioned in KFS) में नहीं है वो है क्रेडिट कार्ड। उधारकर्ता की स्पष्ट सहमति के बिना कार्ड की अवधि के दौरान किसी भी चरण में इस प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा सकता है।