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Success Story : इस IFS अफसर ने घर-घर अखबार बेचकर की पढ़ाई, विदेश में मिली नौकरी छोड़कर UPSC की परीक्षा में सफलता पाई

Motivational Story : इंसान में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो वो हर बाधा को पार सकता है। ऐसा काम चेन्नई के रहने वाले पी बालामुरुगन ने करके भी दिखाया है। पी बालामुरुगन ने घर की आर्थिक हालत बहुत ही खराब (The financial condition of the house is bad) होने के बावजूद छोटी सी उम्र में अखबार बेचकर पढ़ाई की और आज वो एक आईएफएस अफसर हैं। आइये विस्तार से जानते हैं कि गरीबी की हालत में इस अफसर ने किन-किन बाधाओं का सामना किया।
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Success Story : इस IFS अफसर ने घर-घर अखबार बेचकर की पढ़ाई, विदेश में मिली नौकरी छोड़कर UPSC की परीक्षा में सफलता पाई

HBN News Hindi (ब्यूरो) : पैसे और संसाधनों के अभाव में देश की सबसे बड़ी नौकरी (biggest job) हासिल करना कोई आसान काम नहीं (not an easy task) है। लेकिन मन में कुछ करने की ललक हो तो इंसान सभी मुसीबतों का सामना करके अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है।

जी हां ऐसा चेन्नई के रहने वाले पी बालामुरुगन ने करके भी दिखाया है। गरीब परिवार में जन्म होने के बावजूद पी बालामुरुगन ने हार नहीं मानी और अपनी राह खुद (make your own way) बनाई। छोटी सी उम्र में अखबार बेचकर पहली जॉब करने वाले पी बालामुरुगन आज आइएफएस अफसर हैं। आइये विस्तार से जानते हैं कि पी बालामुरुगन ने सभी मुसीबतों से लड़ते हुए अपना लक्ष्य कैसे हासिल किया।

 

बाप शराबी, केवल मां का ही सहारा, कैसे किया गुजारा


बाप शराबी, आठ भाई-बहनों का भरा-पूरा परिवार और केवल एक मां जो अपनी कमाई के बलबूते सभी बच्चों का पालन पोषण (raising children) कर रही। इतना पढ़ते ही आपके जहन में आ गया होगा कि इस परिवार ने किस तरह गुजारा किया होगा।

इस गरीब परिवार की छठी संतान हैं बालामुरुगन पी (Balamurugan P), जोकि फिलहाल राजस्थान के वन विभाग में सरकारी अफसर हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया, इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें।

 

गरीबी के बावजूद घर में था पढ़ाई का माहौल


बता दें कि आईएफएस पी बालामुरुगन चेन्नई के कीलकट्टलाई के रहने वाले हैं और अब वह राजस्थान के वन विभाग में आईएफएस अफसर हैं। उनके घर में गरीबी के बावजूद पढ़ाई-लिखाई का माहौल (learning environment) था। उनकी मां बेशक 10वीं पास थीं, लेकिन उन्होंने अपने 8 बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पी बालामुरुगन अपनी जिंदगी को किसी एडवेंचर से कम नहीं मानते हैं। उनके पिता शराबी थे और 1994 में घर-परिवार को अपने हाल पर छोड़कर चले गए थे।

 

मां ने घर खरीदने के लिए बेच दिए अपने जेवर


पी बालामुरुगन 8 भाई-बहनों में छठे नंबर पर थे। उनके घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनकी मां और मामा किसी तरह से खर्च चला रहे थे। उनकी मां ने चेन्नई के बाहरी इलाके में 4800 वर्ग फुट का घर खरीदने के लिए अपने जेवर बेच दिए (sold jewelery to buy a house) थे।

पूरा परिवार 2 कमरों के टूटे-फूटे मकान में रहता था। हालांकि बालामुरुगन की मां ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को हमेशा प्राथमिकता पर रखा। बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए मां ने 1997-98 में घर का 1200 वर्ग फुट हिस्सा 1.25 लाख रुपये में बेच दिया था।

 

7वीं कक्षा के दौरान अखबार बेचकर कमाए 300 रुपये


बालामुरुगन पढ़ने के शौकीन थे। उन्होंने एक अखबार विक्रेता (newspaper seller) से तमिल अखबार पढ़ने की इजाजत मांगी। उसने बालामुरुगन को 90 रुपये का मासिक पैकेज खरीदने की सलाह दी। उन्होंने उसे अपनी आर्थिक स्थिति (economic condition) से अवगत करवाया। उस विक्रेता ने उन्हें 300 रुपये की नौकरी ऑफर की। तब वह 7वीं कक्षा में थे। वह उस कमाई से हर महीने के अंत में 90 रुपये चुकाने लगे। इस तरह से उनका खबरों के साथ रिश्ता बन गया।

 

'भूखे सोना मंजूर लेकिन पढ़ाई करनी जरूर' था घर का नियम


जब उनके स्कूली शिक्षकों को उनकी नौकरी और पढ़ाई की ललक (desire to study) के बारे में पता चला तो वह भी उनकी मदद के लिए आगे आने लगे। उनके टीचर्स उन्हें अपनी पत्रिकाएं और अन्य स्टडी मटीरियल (study material) देने लगे।

सिर्फ यही नहीं, उनके स्कूल ने भी इस दौरान उनकी बहुत मदद की। कभी उनकी फीस माफ कर दी जाती थी तो कभी ट्यूशन फीस देर से जमा करने की इजाजत मिल जाती थी। आईएफएस अफसर के घर का एक ही नियम था, भूखे भले सो जाओ लेकिन पढ़ाई किए बिना सोना नहीं।

 

बीटेक की डिग्री करने के बाद अच्छे पैकेज पर मिली नौकरी


2011 में पी बालामुरुगन ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री (Engineering degree) हासिल की । कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) में अच्छे पैकेज पर नौकरी मिल गई।

2012 में सबसे बड़ी बहन को नौकरी मिलने से घर की आर्थिक स्थिति में सुधार (improvement in economic situation) होने लगा । साथ ही वह खुद भी टीसीएस ऑफिस में अच्छी कमाई करने लगे। फिर उनका परिवार 5 कमरों के स्थायी मकान में शिफ्ट हो गया था।

 

एक घटना से बदला नजरिया


2013 में एक व्यक्ति ने उनके घर पर कब्जा करने की कोशिश (attempt to take over the house) की। उन्हें पुलिस से मदद की उम्मीद नहीं थी। तभी उन्हें एक महिला आईएएस अफसर के बारे में पता चला, जो तमिल नाडु मुख्यमंत्री के पास लोगों की शिकायतें (people's complaints) लेकर जाती थी। उन्होंने भी एक दिन लंच ब्रेक में शिकायत दर्ज करवा दी। 45 दिनों बाद कुछ अफसरों ने घर आकर दस्तावेजों की मांग की।
 

ऑस्ट्रेलिया से जॉब ऑफर मिल गया और विदेश चले गए


जांच में उनके दस्तावेज सही पाए गए और उनका हिस्सा छिनने से बच गया। इससे उनका प्रशासन पर भरोसा (trust in administration) बढ़ गया। उसी साल उन्हें ऑस्ट्रेलिया से जॉब ऑफर मिल गया। तब तक वह सिविल सर्विस में करियर (career in civil service) बनाने के बारे में सोच चुके थे। लेकिन वह इस उम्मीद से ऑस्ट्रेलिया चले गए कि वहां कुछ डॉलर्स बचाने में मदद मिलेगी। साल 2015 में कुछ सेविंग हो जाने के बाद वह भारत लौट आए। अगले 3 सालों तक वह यूपीएससी परीक्षा में असफल होते रहे।

 

2018 में पास की यूपीएससी आईएफएस की परीक्षा


पी बालामुरुगन ने हार नहीं मानी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई (The hard work paid off) और 2018 में वह यूपीएससी आईएफएस परीक्षा (UPSC IFS Exam) में सफल हो गए। फिर 2019 में ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उन्हें राजस्थान में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) मिल गई। वह ऑस्ट्रेलिया में बिताए हुए दिनों को याद करते हैं। उनका मानना है कि वहां बिताए गए कुछ सालों ने उनके भविष्य को नई दिशा (new direction to the future) प्रदान की है।