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Repo Rate पर RBI जल्द लेगा फैसला, जानिये कार व होम लोन लेने वालों को कितनी मिलेगी राहत!

RBI MPC : monetary policy कमेटी की बैठक जल्द होने वाली है। इसके बाद आरबीआई रेपो रेट पर अपना फैसला दे सकता है। रेपो रेट में कटौती हुई तो कार व होम लोन लेने वालों की मौज हो जाएगी। इससे उनकी लोन ईएमआई कम हो जाएगी। बैठक तीन अप्रैल को शुरू हो रही है। आइये जानते हैं इस बारे में पूरी डिटेल इस खबर में।

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Repo Rate पर RBI जल्द लेगा फैसला, जानिये कार व होम लोन लेने वालों को कितनी मिलेगी राहत!

HBN News Hindi (ब्यूरो) : भारतीय रिजर्व बैंक (reserve Bank of India) के गवर्नर शक्तिकान्त दास (Governor Shaktikanta Das)की अध्यक्षता वाली एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक 3 अप्रैल को शुरू होगी। मौद्रिक नीति समीक्षा की की घोषणा 5 अप्रैल को की जाएगी। लंबे समय से RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती नहीं की गई है। ऐसे में होम, कार लोन समेत तमाम तरह के लोन लिए लोग रेपो रेट में कटौती (Repo rate cut)की उम्मीद लगाए हुए हैं। रेपा रेट में कटौती से उनकी लोन की EMI कम होगी। ऐसे में क्या इस बार रेपो रेट (Repo Rate) में कटौती होगी?  

 

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अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में कई केंद्रीय बैंक

 

PWC India के प्रमुख आर्थिक परामर्शदाता रानेन बनर्जी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कुछ केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत दरों में कटौती शुरू कर दी है लेकिन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं। भारत और अमेरिका (India and America)के बीच प्रतिफल (बॉन्ड) का अंतर कम हो गया है, जिससे कोष प्रवाह पर दबाव पड़ रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस बात की काफी संभावना है कि एमपीसी नीतिगत दर को यथावत रखेगा। लेकिन दर में कटौती को लेकर एक छोटी संभावना भी है। एमपीसी के कुछ सदस्य नीतिगत दर में कटौती के लिए मतदान कर सकते हैं लेकिन वे बहुमत में नहीं हैं।’’ 

 

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रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम 


इस सप्ताह पेश मौद्रिक नीति समीक्षा (monetary policy review)एक बार फिर नीतिगत दर में बदलाव की संभावना नहीं है। इसका कारण आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता दूर होने और इसके करीब आठ प्रतिशत रहने के साथ केंद्रीय बैंक का अब और अधिक जोर मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने पर हो सकता है। 

 

यह कहना है एक्सपर्ट्स का

 

विशेषज्ञों ने यह बात कही है। साथ ही नीतिगत दर (policy rate)पर निर्णय लेने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कुछ विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों के रुख पर गौर कर सकती है। ये केंद्रीय बैंक नीतिगत दर में कटौती को लेकर स्पष्ट रूप से ‘देखो और इंतजार करो’ का रुख अपना रहे हैं। विकसित देशों में स्विट्जरलैंड पहली बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसने नीतिगत दर में कटौती की है। वहीं दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जापान आठ साल बाद नकारात्मक ब्याज दर की स्थिति को समाप्त किया है।

 

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2024-25 की पहली मौद्रिक नीति की समीक्षा (monetary policy review)होगी


यह वित्त वर्ष 2024-25 की पहली मौद्रिक नीति की समीक्षा (monetary policy review)होगी। एक अप्रैल, 2024 से शुरू वित्त वर्ष में एमपीसी की छठ बैठकें होगी। आरबीआई ने पिछली बार फरवरी 2023 में रेपो दर बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था। उसके बाद लगातार छह द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में इसे यथावत रखा गया है। 

 

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मुद्रास्फीति अभी पांच प्रतिशत के दायरे में


बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस (Economist Madan Sabnavis)ने कहा, ‘‘मुद्रास्फीति अभी भी पांच प्रतिशत के दायरे में है और खाद्य मुद्रास्फीति के मोर्चे पर भविष्य में झटका लगने की आशंका है, इसको देखते हुए एमपीसी इस बार भी नीतिगत दर और रुख पर यथास्थिति बनाए रख सकता है।’’ उन्होंने कहा कि जीडीपी अनुमान में संशोधन हो सकता है। इस पर सबकी बेसब्री से नजर होगी। सबनवीस ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2023-24 में आर्थिक वृद्धि उम्मीद से कहीं बेहतर रही है और इसीलिए केंद्रीय बैंक (Central bank)को इस मामले में चिंताएं कम होंगी और वह मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप लाने पर ज्यादा ध्यान देना जारी रखेगा।’’