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Property Rights : पत्नी भी पति को कर सकती है बेदखल! जानिये कानूनी प्रावधान

Personal Property Rights : हर दिन समाज में प्रॉपर्टी के विवाद बढ़ रहे हैं। कभी भाई-बहन की प्रॉपर्टी का विवाद तो कभी पिता-बेटे और कभी पति-पत्नी के बीच ऐसे विवाद बढ़ रहे हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी प्रॉपर्टी को पहले तो पति व पत्नी मिलकर लेते हैं और बाद में अनबन होने पर हक को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में पति द्वारा पत्नी को घर से निकाले जाने की बात तो आपने सुनी होगी, लेकिन क्या पत्नी भी पति को घर से निकाल सकती है। आइये जानते हैं कानूनी प्रावधान।

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Property Rights : पत्नी भी पति को कर सकती है बेदखल! जानिये  कानूनी प्रावधान

HBN News Hindi (ब्यूरो) :  जमीन, जायदाद को लेकर आए दिन झगड़े व विवाद होते रहते हैं। कोर्ट-कचहरी में दावे जताए जाते हैं। पति-पत्नी के बीच संपत्ति के विवाद भी काफी देखने को मिलते हैं। आमतौर पर विवाद बढ़ने पर पति द्वारा पत्नी को घर से निकाले जाने की बातें सामने आती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या पत्नी भी पति को घर से निकाल सकती है? खासकर उस स्थिति में जब दोनों ने मिलकर ही संपत्ति को खरीदा हो। आइये जानते हैं क्या है कानून में प्रावधान। 

 

 

इस मामले में पत्नी ने की थी पति को घर से निकालने की मांग


घरेलू विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई के एक मैजिस्ट्रेट कोर्ट में ऐसा ही एक मामला आया, जिसमें पत्नी ने पति को घर से निकालने की मांग की थी। इस घर को दोनों ने मिलकर खरीदा था, जिसे लेकर कोर्ट ने कहा कि पति का घर पर कानूनी अधिकार है और उसे निकाला नहीं जा सकता। 

 

यह फैसला सुनाया कोर्ट ने

 

हालांकि कोर्ट ने कहा कि यह पति का नैतिक फर्ज है कि वह अपनी पत्नी और बेटियों के साथ घर में रहे ताकि उनकी देखभाल कर सके। महिला और उसकी बेटियां अलग रहती हैं। कोर्ट ने शख्स को आदेश दिया कि वह पत्नी को मैंटिनेंस के तौर पर 17 हजार रुपये हर महीने दे। मैंटिनेंस का भुगतान अगस्त 2021 से होगा जब महिला ने पहली बार कोर्ट का रुख किया था।

घरेलू हिंसा के मामले में यह है प्रावधान


अगर महिला घरेलू हिंसा (domestic violence) का शिकार होती है तो कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है और पति से आजीवन गुजारा भत्ता (lifetime gujara bhatta)मांग सकती है। इस बारे में दावा करने का उसे पूरा हक है। भारत में कानून के अधिकार के तहत ही पत्नी का पति की प्रॉपर्टी पर हक होता है। शादी के बाद अगर पति-पत्नी अलग होने का फैसला लेते हैं तो महिलाएं हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पति से भत्ता मांग सकती हैं। 


ससुराल में घर में रहने का अधिकार


हिंदू अडॉप्शंस ऐंड मैंटिनेंस एक्ट, 1956 के तहत हिंदू (Hindu Adoptions and Maintenance Act) पत्नी को अपने ससुराल के घर में रहने का अधिकार है। भले ही उसके पास उसका स्वामित्व हो या न हो। एक्ट के अनुसार इससे फर्क नहीं पड़ता कि ससुराल का घर पैतृक संपत्ति है, जॉइंट फैमिली वाला है, स्वअर्जित है या फिर किराये का घर है। महिला को अपने ससुराल वाले घर में रहने का ये अधिकार तब तक है जब तक उसके पति के साथ उसके वैवाहिक संबंध बरकरार रहता है। अगर महिला पति से अलग हो जाती है तब वह गुजारा भत्ते का दावा (alimony claim)कर सकती है।

खुद से अर्जित संपत्ति पर होता है पूरा अधिकार

व्यक्ति की खुद से अर्जित संपत्ति चाहे जमीन हो, मकान हो, पैसे हों, गहने हों या कुछ अन्य इस पर पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ उसी व्यक्ति का अधिकार है जिसने संपत्ति अर्जित की है। वह अपनी इस संपत्ति को बेच सकता है,गिरवी रख सकता है,वसीयत लिख सकता है, किसी को दान भी दे सकता है। इससे जुड़े सभी अधिकार उसके पास सुरक्षित होते हैं।