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OPS Demand : वोट उसी को जाएगा, जो बुढ़ापे की लाठी लौटाएगा, कर्मचारी संगठन ने उठाई ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग

Lok Sabha Election 2024 : देश में जहां लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सरगर्मियां तेज है, वहीं कर्मचारी संगठन ने भी ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग (Demand for old pension scheme) उठाकर सभी दलों के राजनीतिक नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी (raised the heartbeats of the leaders) हैं। कर्मचारी संगठन का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर 'हैशटैग OPS हमारा अधिकार' अभियान शुरू किया जाएगा। आइये विस्तार से जानते हैं कि कर्मचारियों के इस एलान से क्या हलचल हो सकती है।
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OPS Demand : वोट उसी को जाएगा, जो बुढ़ापे की लाठी लौटाएगा, कर्मचारी संगठन ने उठाई ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग

HBN News Hindi (ब्यूरो) : देश में लोकसभा चुनाव 2024 सिर पर है और इस चुनाव को लेकर फिलहाल जहां सियासी पारा (political mercury) चढ़ा हुआ है, वहीं कर्मचारी संगठन ने भी इस पारे को और बढ़ाने का काम कर दिया है।

कर्मचारी संगठन ने एलान किया है कि जो उनकी बुढ़ापे की लाठी लौटाएगा, वोट उसी को जाएगा। कर्मचारियों के इस एलान से सभी राजनीतिक दलों (all political parties) के नेताओं की धड़कनें तेज हो गई हैं। आइये विस्तार से जानते हैं कि इसको लेकर कर्मचारी संगठन की और क्या प्रतिक्रिया है।

 

 

सोशल मीडिया पर किया प्रचार तेज


बता दें कि कर्मचारी संगठन ने पोस्टर में 'एक देश एक विधान सबको पेंशन एक समान', ' हैशटैग ओपीएस इज अवर राइट' और 'हैशटैग नो पेंशन नो वोट' जैसे स्लोगन (Slogan) लिख रखे हैं। इस चुनाव में ये कर्मचारी राजनीतिक दलों के मंसूबों पर पानी (water on plans) फेरने के लिए तैयार हैं और इसके लिए इन्होंने सोशल मीडिया (social media) पर प्रचार भी तेज कर दिया है। इसको लेकर कर्मचारी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अन्य से समर्थन भी मांग रहे हैं।

 

नेताओं की पेंशन बढ़ रही और कर्मचारियों की बंद कर रहे


कर्मचारी नेताओं ने अंबेडकर जयंती के मौके पर कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर साहेब ने संविधान के अंदर रहकर बिना मांगे कर्मचारियों को पेंशन दी थी। तमाम राजनीतिक दलों का घोषणा पत्र आया, लेकिन दुर्भाग्य है कि हमसे पुरानी पेंशन छीनी जा रही (Old pension is being snatched away) है। नेताओं की पेंशन बढ़ाई जा रही है और कर्मचारियों की पेंशन बंद की जा रही है।

 

जो हमारी बात करेगा हम भी उसकी बात करेंगे


कर्मचारी संगठन का कहना है कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक कर्मचारी एक हैं। पेंशन नहीं तो वोट (no pension no vote) नहीं। नेता पेंशन लेंगे, लेकिन देश के सैनिकों को पेंशन नहीं देंगे, ये कहां का न्याय है। जो हमारी बात करेगा हम उसकी बात करेंगे। हम कर्मचारी के साथ-साथ एक मतदाता भी हैं। आम जनता (General public) इस बार बोल नहीं रही है। संकेत साफ है, समझ लीजिए कि जनता कुछ सोच रही है, कुछ नया होने वाला है।

 

हक की लड़ाई लड़ रहे हैं हम


कर्मचारियों ने कहा कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में हमारी रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें 15 लाख लोग आए थे । इसका मतलब मुद्दे में दम (substance in the matter) है। हम हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। ये पढ़ा लिखा बुद्धिजीवी समाज है। ओल्ड पेंशन इकोनॉमी को मजबूत (strengthen the economy) करती है। धीरे-धीरे सभी विभागों का निजीकरण (Privatization) किया जा रहा है, जिनको खत्म किया जाए।

 

नेता वेतन बढ़वा लेते हैं और कर्मचारियों के लिए पैसा नहीं


कर्मचारी संगठन ने कहा कि सरकार निजीकरण समाप्त करे। महंगाई बढ़ती जा रही है और सातवें वेतन आयोग के बाद आठवें वेतन आयोग पर रोक (Ban on 8th Pay Commission) लगा दी गई। विधानसभा और संसद में नेता अपना वेतन हाथ उठाकर बढ़ा लेते हैं।

उस समय सभी नेता एक हो जाते हैं। कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं हैं। ये सरकार का दोगलापन (Government's hypocrisy) है।  नेताओं को बंगला, ड्राइवर, सुरक्षा, स्टाफ सब सरकारी चाहिए और देश की जनता के लिए सब प्राइवेट कर दिया।