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MDH-Everest : ये एंजेंसी लगाएगी भारतीय मसालों पर मुहर, उसके बाद ही भेजे जा सकेंगे विदेश

MDH-Everest Update :एमडीएच व इवरेस्ट मसालों पर लगे प्रतिबंध (Spices Sector news)के बाद सभी भारतीय मसालों की कंपनियों के लिए मुसीबत बढ़ चुकी है। लेकिन भारत (Spices Board of India)ने भी अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब भारतीय मसाले जब भी विदेश भेजे जाएंगे, इससे पहले ये एंजेंसी अपनी मुहर लगाएगी। उसके (Spice export from India)बाद भारतीय मसाले निर्यात किए जा सकेंगे। तो आइये जानते हैं कि भारत ने अपने पक्ष में और क्या-क्या कहा।

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MDH-Everest : ये एंजेंसी लगाएगी भारतीय मसालों पर मुहर, उसके बाद ही भेजे जा सकेंगे विदेश

HBN News Hindi (ब्यूरो) : सिंगापुर, हांगकांग, अमेरिका सहित अन्य देशों ने एमडीएच-इवरेस्ट मसालों पर (Spices export to Singapore)गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उन्हें प्रतिबंध कर दिया था। लेकिन इस पर भारत ने अपना मजबूत पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि जब भी भारतीय मसालें विदेशों में भेजे जाएंगे तो ईटीओ की मुहर लगनी आवश्यक होगी अन्यथा मसालों को विदेश नहीं भेजे जा सकेंगे। भारत के स्पाइसेज बोर्ड ने सिंगापुर-हांगकांग जैसे देशों को निर्यात होने वाले मसालों की (Spices export to Hong Kong)टेस्टिंग के बारे में निर्देश जारी किया है। दोनों देशों को निर्यात किए जाने वाले मसालों में एथिलीन ऑक्साइड (ETO) की जांच अनिवार्य कर दी गई है। 6 मई से ऐसी जांच अवश्य करनी होगी और स्पाइसेज बोर्ड से इस बारे में सर्टिफिकेट मिलने पर ही इन दोनों देशों को मसाले भेजे जाएंगे। 

 

 

यह कहा स्पाइसेज बोर्ड ने 
स्पाइसेज बोर्ड ने अपने सर्कुलर में कहा, ‘स्पाइस प्रोडक्ट्स में एथिलीन ऑक्साइड होने से जुड़ी (स्पाइसेज सेक्टर न्यूज)चिंताओं को देखते हुए स्पाइसेज बोर्ड ने स्पाइस इंडस्ट्री से चर्चा की और (भारत से मसालों का निर्यात)यह तय किया कि सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग भेजे जाने वाले मसालों में ETO की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी।

2022-23 में भारत से 3.95 बिलियन डॉलर का मसाला निर्यात हुआ


बोर्ड के मुताबिक, ‘सिंगापुर फूड एजेंसी के मुताबिक, मसालों में ETO की मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट 50ppm होनी चाहिए। हॉन्गकॉन्ग में ETO पूरी तरह से प्रतिबंधित है। लिहाजा रेडी टु ईट प्रोडक्ट्स सहित सिंगापुर (सिंगापुर को मसालों का निर्यात)और हॉन्ग कॉन्ग भेजे जाने वाले सभी स्पाइस कंसाइनमेंट्स के साथ स्पाइसेज बोर्ड की ओर से जारी एनालिटिकल रिपोर्ट होनी चाहिए।’ दुनिया के सबसे बड़े मसाला निर्यातक भारत के लिए यह मामला काफी संवेदनशील है। स्पाइसेज बोर्ड के मुताबिक, 2022-23 में भारत से 3.95 बिलियन डॉलर का मसाला निर्यात हुआ था। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव ने एक रिपोर्ट में कहा है कि इस विवाद के चलते भारत के आधे मसाला निर्यात पर आंच आ सकती है।

एक्शन में सरकार


सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग में विवाद उठने के बाद कॉमर्स मिनिस्ट्री ने दोनों देशों के फूड सेफ्टी रेगुलेटरों से प्रतिबंध (मसाला बोर्ड क्या है)की वजहों की जानकारी मांगी थी, साथ ही वहां भारतीय दूतावासों से भी अपडेट्स तलब किए थे। इधर, FSSAI भी देश में मसालों के सैंपल जुटा रहा है। इससे पहले पिछले साल 23 मार्च को जारी सर्कुलर में बोर्ड ने यूरोपियन यूनियन को निर्यात होने वाले मसालों में ETO की अधिकतम मात्रा तय की थी। उसके मुताबिक, करी मसाला, करी पेस्ट और रेडी टु ईट प्रोडक्ट्स में ETO की अधिकतम मात्रा 0.1 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम होनी चाहिए।


 

ये है मामला


सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग ने कथित तौर पर कीटनाशक ETO होने का हवाला देकर एमडीएच और एवरेस्ट के 4 मसाला (हॉन्ग कॉन्ग को मसालों का एक्सपोर्ट)प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। एवरेस्ट के फिश करी मसाला के अलावा एमडीएच के मद्रास करी पाउडर, सांभर मसाला पाउडर और करी पाउडर पर इन देशों के फूड सेफ्टी रेगुलेटरों ने सवाल उठाए थे। इंटरनैशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के मुताबिक, ETO से कैंसर होने का खतरा होता है। एवरेस्ट और एमडीएच ने कहा था कि उनके उत्पादों की क्वॉलिटी बिल्कुल ठीक है।