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BPL राशन कार्डधारकों का यहां खप रहा राशन, जानिये कौन कर रहा गड़बड़झाला

BPL Ration Card:राशन कार्ड भारत सरकार की तरफ से जारी किया जाने वाला एक जरूरी दस्तावेज है, जिसके जरिए सरकार गरीब लोगों को उचित दामों  में राशन उपलब्ध कराती है। लेकिन कई समय से  कार्ड धारकों से यह भी शिकायत मिल रही थी कि कोटेदार उन्हें कम राशन दे रहा है। आइए जानते हैं इसके पीछे के कारणों के बारे में।

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BPL राशन कार्डधारकों का यहां खप रहा राशन, जानिये कौन कर रहा गड़बड़झाला


HBN News Hindi (ब्यूरो ) : सबसे पहले आपको बता दें कि गरीब लोगों को यह मदद(BPL Ration Card) राशन की दुकान के जरिए दी जाती है,पर कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें लोग शिकायत करते हैं कि राशन कोटेदार ने उन्हें राशन देने से मना कर दिया या फिर कई बार वजन कम रहने या क्वालिटी खराब होने की शिकायतें सामने आती हैं ।आइए जानते हैं इस पूरी खबर के बारे में।

 


कोटेदार कर रहे काली कमाई

काली कमाई विभिन्न ब्लॉकों में खाद्यान्न आवंटन पर (BPL Ration Card 2024)निर्भर करती है। गुरारू प्रखंड में लगभग 23429 राशन कार्डधारी हैं। राशन कार्ड में 82377 व्यक्तियों का नाम लाभार्थी के रूप में दर्ज है। इन्हीं लोगों से जनवितरण प्रणाली की दुकानों पर एक किलो चावल या एक किलो गेहूं की कटौती की जाती है।ऐसे में 82377 किलोग्राम चावल या गेहूं काटकर (rashan card ke fayde)खुले बाजार में बेचे जाने की संभावना है। चावल काटना है या गेहूं, इसका फैसला विक्रेता खुले बाजार में ऊंची कीमत देखकर करता है।


बाजार में गेहूं की कीमत 
फिलहाल बाजार में गेहूं की कीमत करीब 23 रुपये प्रति किलो और (breaking News)चावल की कीमत करीब 27 से 30 रुपये प्रति किलो है। इस तरह सरकार की ओर से मुफ्त में मिलने(BPL ration card holders) वाले चावल या गेहूं को खुले बाजार में बेचकर हर महीने करीब 15 से 20 लाख रुपये कमाने की संभावना है।


अनाज सीधे बाजार में आता है
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर सरकारी बोरों में भरकर आने वाले (बीपीएल राशन कार्ड)अनाज को सरकारी बोरों में बदलकर खुले बाजार में पहुंचाया जाता है। दुकानों में अनाज कम रहने के कारण जन वितरण प्रणाली के दुकानदार अगले माह आवंटित अनाज को एसएफसी के अनाज गोदाम से सीधे डोर स्टेप डिलिवरी ठेकेदारों को बेच देते हैं।

 


अवैध गोदामों में बदल कर बेच देते हैं अनाज

ठेकेदार सरकारी बोरियों को मथुरापुर की ओर अवैध गोदामों में बदल कर(बीपीएल राशन कार्ड से सस्ते में मिल जाता है राशन) अनाज को खुले बाजार में बेच देते हैं। दबंग किस्म के जन वितरण प्रणाली के दुकानदार रात के अंधेरे में खुद ही अपनी दुकानों से बोरा बदल कर गुरारू बाजार के स्टेशन रोड स्थित अनाज मंडी में अनाज बेच देते हैं। कुछ माह पहले इसी तरह के मामले को लेकर इस्माइलपुर इलाके में ग्रामीणों ने हंगामा किया था।

 

कम अनाज मिलने पर  धारक क्यों रहते चुप
राशन कार्ड धारकों को कम अनाज मिलने (बीपीएल राशन कार्ड को कम राशन मिलने पर क्यों रहते हैं शांत)पर भी वे चुप रहते हैं। इसके पीछे की वजह काफी दिलचस्प है। बड़ी संख्या में सक्षम और ताकतवर लोगों ने राशन कार्ड बनवा लिया है। सक्षम और ताकतवर समझे जाने वाले लोग अनाज में कटौती होने पर चुप रहते हैं। यह देख गरीब लाभार्थी कटौती का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। राशन कार्ड बनवाने के लिए 15 बिंदुओं पर सर्वे किया जाता है। गलत सर्वे के कारण बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के भी राशन कार्ड बन गये हैं।