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Social Media का ज्यादा इस्तेमाल दिल ही नहीं दिमाग को भी कर देता है डैमेज, जानिये कितने हैं साइड इफेक्ट

Side Effects of Social Media : आज के समय में टैक्नालॉजी का यूज बहुत बढ़ गया है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि इन दिनों हर किसी की लाइफ सोशल मीडिया के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है। सोशल मीडिया आज की लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा बन चुका है जिससे लोग थाड़ी देर भी दुर नही रह पाते हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि जरूरत ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल आपके लिए कई समस्याओं की वजह बन सकता है।आइए जानते हैं उन समस्याओं के बारे में।
 
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Social Media का ज्यादा इस्तेमाल दिल ही नहीं दिमाग को भी कर देता है डैमेज, जानिये कितने हैं साइड इफेक्ट

HBN News Hindi (ब्यूरो) : बाहरी दुनिया से अपडेट रहने के लिए हम सभी किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़े हुए होते हैं, बच्चे हों या फिर बुजुर्ग कोई भी इससे  दुर नहीं है । जैसा कि हम जानते ही हैं कि आज के समय मे हर कोई सोशल मीडिया का दीवाना है। इस (social media uses)का एक नोटिफिकेशन हमे हमारे जरूरी काम से डिस्ट्रेक्ट कर देता है। आइए जानते हैं इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स के बारे में।

 

सोशल मिडिया ज्यादा यूज करने के लक्षण 


आजकल के मॉडर्न टाइम में स्टूडेंट्स से लेकर के वर्किंग लोगों की लाइफ सोशल मीडिया ( Social Media) के चारों ओर घूमती नजर आती है। सोशल मीडिया के बिना रहना पड़ जाए तो लोग एंक्साइटी तक का शिकार हो जाते हैं। इसलिए(social media uses and side effects) कहा जाता है कि सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल को अवॉइड करना चाहिए। वर्ष 2019 में हुए एक रिसर्च की मानें तो जितने भी टिनेजर हैं जो आय दिन कम से कम तीन घंटे या उससे अधिक सोशल मीडिया का यूज करते हैं, उन स्टूडेंट्स में गुस्सा, दिमागी बीमारी जैसे लक्षण ज्यादातर देखने को मिलते हैं।

 
सोने की समस्या के हो सकते हैं शिकार


इस बात से तो आप भी बिल्कुल वाकिफ होंगें कि आजकल लगभग प्रत्येक व्यक्ति की ये हैबिट(Side Effects of Social Media)बन चुकी है कि सोने से पहले फोन का इस्तेमाल करना ही करना है। कभी कभी तो, ऐसा भी हो जाता है कि फोन चलाते चलाते कब घंटों निकल जाते हैं पता भी नहीं चलता है, ऐसे में अनिद्रा अन्य स्लीप डिसऑर्डर के अलावा बॉडी से रिलेटेड कई सारी गंभीर समस्याएं होने के खतरा दो गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

 

ट्रेंडिंग और अपडेटेड वर्जन का ही चाहिए 


दरअसल, सोशल मीडिया को एक बहुत मेन औजार भी माना जाता है, इसमें लोग(Breaking news updates) उसी काम को करना पसंद करते हैं जिसका ट्रेंड चल रहा हो। कपड़ों से लेकर के खान पान, फैशन, मोबाइल फोन। सबकुछ ट्रेंडिंग और अपडेटेड वर्जन का ही चाहिए होता है। कई बार तो जब वो सोशल मीडिया में दिखने वाली वस्तुओं को नहीं ले पाते हैं तो इसका असर उनके दिमाग और बिहेवियर के उपर भी पड़ता है। जिससे वो धीरे धीरे अवसाद ( Depression) का शिकार हो जाते हैं।


घटनाएं बढ़ने का खतरा डबल हो जाना


अक्सर देखा जाता है कि सोशल मीडिया पर अपनी पूरी इनफॉर्मेशन , जैसे कि (social media ke side effect)अपडेटेड लोकेशन, डीपी यानी कि डिसप्ले पिक्चर, वीडियो तक शेयर कर देते हैं। जिससे हैकर्स जैसे लोग उनके इन्फो का गलत इस्तेमाल और मिस यूज भी कर सकते हैं। इसके अलावा प्राइवेसी का मिसयूज और अन्य प्राइवेसी बाधित करने जैसी घटनाएं बढ़ने का खतरा डबल हो जाता है।

 

ओवरवेट को बढ़ावा 


फोन के अधिक इस्तेमाल और एडिक्शन की वजह से लोग अपने बेड से उठने में भी आलस करते हैं। इतना ( Social media ke use se ho skte hai Depression ka shikar)ही नहीं खाना खाते टाइम वीडियो और रील्स चल रहे होते हैं। ये सारी चीजें ओवरवेट को बढ़ावा देती हैं। वहीं, फोन चलाते चलाते कब खाना धीरे धीरे एक्स्ट्रा हो जाता है ये भी पता नहीं चलता है।

 

 

शांति से विचार करने कि क्षमता हो जाती है खत्म


बात करें सोशल मीडिया की तो ये तमाम(Breaking news in hindi) सच से लेकर के झूठ इनफॉर्मेशन का भंडार होता है। वहीं, इसके ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग में कई अलग अलग तरीके की इनफॉर्मेशन स्टोर होती जाती है। दिमाग में क्रिएटिव आइडियाज आना लगभग खत्म से हो जाते हैं। क्योंकि व्यक्ति का मेन फोकस तो मेल, मैसेज, नोटिफिकेशन, कॉल, टेक्स्ट पर ही रहता है। जिससे शांति से विचार करने कि क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।