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बिन ब्याही मां से मिलने को बेकरार, बेटी पहुंची सात समंदर पार, कोई तो मेरी मां का पता बता दे कर रही बस यही पुकार

Desire to Meet Mother : सच ही कहा है कि इस दुनियां में मां से बढ़कर कुछ नहीं है। मां की ममता (mother's love) नसीब वालों को मिलती है। मां की ममता की छांव (shadow of love) में चैन की नींद लेने के लिए विदेश से एक महिला भारत आई है और वो हर जगह अपनी मां को ढूंढ रही है। आइये नीचे विस्तार से जानते हैं कि स्वीडन से आई इस महिला की मां कौन है और वो कहां रहती है।
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बिन ब्याही मां से मिलने को बेकरार, बेटी पहुंची सात समंदर पार, कोई तो मेरी मां का पता बता दे कर रही बस यही पुकार 

HBN News Hindi (ब्यूरो) : तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है प्यारी-प्यारी है ओ मां...आपने यह गाना जरूर सुना होगा। जिस प्रकार इस गाने को सुनकर मन भर आता है और आंखें छलक (eyes widen) जाती हैं ठीक उसी तरह सात समंदर पार (across the seven seas) से आई इस बेटी की पुकार (daughter's call) सुनकर भी आंखों में आंसू आ जाते हैं। आइये विस्तार से जानते हैं कि इस बेटी की मां कहां खो गई।

 

मैं मां को गले लगाना चाहती हूं


अपनी जैविक मां की तलाश (search for mother) में 7 समंदर पार से आई महिला का कहना है कि कोई मेरी मां का पता बता दे, एक बार मिला दे। मैं मां को गले लगाना चाहती हूं। एक बार मां के सीने से लगकर चैन की नींद (peaceful sleep) सोना चाहती हूं। मुझे मां से कोई गिला शिकवा नहीं, उन्होंने मुझे छोड़ दिया, कोई बात नहीं, लेकिन उनसे मिलने की मन में बहुत इच्छा है। 
 

नागपुर का कोना-कोना छान दिया


स्वीडन से एक महिला अपनी जन्म देने वाली मां (biological mother) को तलाशने के लिए भारत आई है। उसने नागपुर का एक-एक कोना खंगाल दिया। सभी सरकारी रिकॉर्ड (government records) देख लिए, लेकिन उसने कसम खाई है कि वह अपनी मां को मिले बिना नहीं जाएगी।

 

40 साल बाद मां की तलाश में स्वीडन से इंडिया आई पेट्रीसिया


41 साल की पेट्रीसिया एरिकसन स्वीडन से इंडिया आई हैं। वे अपनी मां को तलाश रही हैं, जो बिन ब्याही मां (unmarried mother) बनी थीं और फिर उन्होंने बेटी को एक अनाथालय में छोड़ दिया था। उस बच्ची को स्वीडन के परिवार ने गोद लिया था और अब 40 साल बाद वह अपनी मां को ढूंढने (to find mother) के लिए भारत आई है। उसका कहना है कि वह अपनी मां से मिले बिना नहीं जाएगी।
 

अविवाहित मां ने छोड़ दिया था अनाथ आश्रम में


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रीसिया ने बताया कि उसका जन्म फरवरी 1983 में हुआ था, लेकिन अविवाहित मां बनी उसकी मां ने उसे एक अनाथ आश्रम में छोड़ दिया। जब वह एक साल की थी तो एक स्वीडिश परिवार ने उसे गोद लिया और वह स्वीडन चली गई। जब उसे पता चला कि उसकी जन्म देने वाली मां (biological mother) इंडिया में है तो वह उनकी तलाश में भारत आ गई।

 

सब जगह ढूंढा, लेकिन नहीं लगा सुराग


वह उस अनाथ आश्रम में भी गई, जहां उसे छोड़ा गया था, लेकिन वहां उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उसने भारतीय नियमों (indian rules) के अनुसार, जहां-जहां बच्चों और उनके माता-पिता का रिकॉर्ड हो सकता है, सब जगह तलाश कर लिया, लेकिन मां का सुराग नहीं लगा। आंगनबाड़ियों, स्कूलों, पुलिस स्टेशनों और शांतिनगर के पुराने इलाकों का दौरा भी कर लिया, लेकिन शांता नहीं मिली।
 

मैं खुद भी मां हूं और मां क्या होती है खूब समझ सकती हूं


पेट्रीसिया बताती है कि उसे सिर्फ मां का नाम पता है, सोमवार को वह उनकी तलाश में रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट (Red-light district) में भी गई, लेकिन वहां भी शांता नाम की महिला नहीं मिली। पेट्रीसिया कहती हैं कि वे 3 बेटों की मां हैं और मां होना क्या होता है, वह समझ सकती हैं। मैं यहां किसी को जज करने के लिए नहीं आई हूं। स्वीडिश माता-पिता की दिल से आभारी हूं, उन्होंने मेरी अच्छी परवरिश (good upbringing) की।

 

बचपन से रखती हूं मां से मिलने की चाहत


मेरे पास उनकी कृतज्ञता के लिए शब्द नहीं हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि उनके पास उनकी मां या उनकी तस्वीर के बारे में प्रामाणिक डेटा (authentic data) होगा। पेट्रीसिया बचपन से ही अपनी मां से मिलने की चाहत रखती हैं, और अपने शहर की किसी भी सांवली औरत (dark woman) की देखकर वह उसके पास जाती थीं। अब उन्होंने अपने गोद लेने के दस्तावेजों की जांच (scrutiny of documents) शुरू की है।