HBN News Hindi

Hero और Honda क्यों हुए थे अलग, इन कंपनियों के बीच ऐसे आई फूट

Hero And Honda Seperation History:  आपको बता दें कि हीरो और होंडा दो अलग-अलग कंपनियां थीं लेकिन हीरो-होंडा की पार्टनरशिप देश की सबसे मजबूत ऑटोमोबाइल पार्टनरशिरप में से एक मानी जाती थी लेकिन इन दोनों कंपनी के बीच कुछ ऐसा हुआ कि कई सालों की ये पार्टनरशिप खत्म हो गई, और दोनों कंपनियों ने आगे चलकर अपने रास्ते अलग कर लिए और एक-दूसरे की टक्कर देने वाली की कंपनी बन गई, जानिए कैसे 
 
 | 
Hero और Honda क्यों हुए थे अलग, इन कंपनियों के बीच ऐसे आई फूट

HBN News Hindi (ब्यूरो):पहले हीरो-होंडा को लोग एक ही कंपनी के तौर पर देखते थे। लेकिन, ये दोनों कंपनियां आपसी साझेदारी के साथ काम कर रही थीं फिर 2010 में दोनों कंपनियों के बीच में कुछ ऐसा हुआ की, इन दोनों की राहें(hero vs honda) अलग-अलग हो गई, इसके बाद हीरो मोटोकॉर्प और होंडा नाम से दो (hero honda split case)अलग कंपनी की बाइक बन गई,चलिए जानते हैं कि इस मजबूत पार्टनरशिप के बीच दरार के पीछे की क्या वजह थी।

 

 

 

हीरो होंडा के सफलता के पीछे  की वजहें

 

भारतीय टू-व्हीलर वीइकल इंडस्ट्रकी में हीरो और होंडा की जोड़ी का नाम एक सुनहरे अध्याय के रूप में लिखा गया है। 1984 में शुरू हुई यह साझेदारी 26 साल तक चली, जिसने भारत में लाखों लोगों को सस्ती और किफायती मोटरसाइकल उपलब्ध कराकर क्रांति ला दी थी। हीरो होंडा की सफलता (hero honda kaise hui develop)के पीछे कई वजहें थीं। सबसे पहले तो यह बात कि दोनों कंपनियों को भारतीय बाजार की गहरी समझ थी। हीरो के पास बाजार में पैठ और बड़ा डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क था, जबकि होंडा के पास अत्याधुनिक तकनीक और अनुभव था।

 

 


मिल जाती थी किफायती कीमतों पर 


हीरो होंडा ने सीडी 100, स्प्लेंडर और एक्टिवा जैसे शानदार मॉडल पेश किए, जो भारतीय (hero honda ke best models)ग्राहकों की पसंद बन गए। इन टू-व्हीलर्स की बेहतर माइलेज, कम मेंटेनेंस कॉस्ट और किफायती कीमतों ने उन्हें आम आदमी के बीच काफी पॉपुलर बना दिया।

 

 हीरो और होंडा के अलग होने के कारण


देश-दुनिया में धूम मचाने के बाद साल 2010 में हीरो और होंडा ने अलग होने का फैसला लिया, जो कि इंडियन टू-व्हीलर इंडस्टी के लिए उस समय बड़ी खबर थी। हालांकि, एक्सपर्ट्स इसके पीछे कई कारणों के बारे में बताते हैं और आज हम आपको कुछ प्रमुख वजहों के बारे में बताते हैं।

 

मार्केट कंडिशन में बदलाव के कारण


समय के साथ भारतीय दोपहिया वाहन बाजार में बदलाव आया। स्कूटर और प्रीमियम बाइकों की मांग बढ़ने लगी, जिसके लिए नई टेक्नॉलजी (hero vs honda)और प्रोडक्ट्स की जरूरत थी। हीरो और होंडा के बीच कंट्रोल को लेकर कई मसले थे।(hero honda ke alg hone k karan) हीरो अपनी कंपनी में अधिक स्वायत्तता चाहती थी, जबकि होंडा अपनी टेक्नॉली और ब्रैंड पर ज्यादा नियंत्रण चाहती थी।

भविष्य को लेकर अलग-अलग योजनाएं

 दोनों कंपनियों की भविष्य की योजनाएं (hero honda ki future planning)भी अलग-अलग थीं। हीरो भारत में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती थी, जबकि होंडा ग्लोबल मार्केट में विस्तार चाहती थी।


 इनके अलग होने का वाहन उद्योगो पर हुआ असर 


हीरो और होंडा के अलग होने का भारतीय दोपहिया वाहन उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ा। हीरो मोटोकॉर्प भारत में सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता बनी रही, और उसने स्प्लेंडर जैसी पॉपुलर बाइक का उत्पादन जारी रखा। होंडा(Hero And Honda ki best production) मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने भी भारत में अपनी उपस्थिति बनाए रखी, और उसने एक्टिवा, डियो और ग्रेजिया जैसे स्कूटर के साथ ग्राहकों की बदलती जरूरत का ध्यान रखते हुए एक से बढ़कर एक नए मॉडल पेश किए। इन सबके बीच एक बात जरूर माननी चाहिए कि हीरो होंडा (hero honda ki bikes ki quality)कंपनियों ने लाखों भारतीयों को सस्ती और किफायती बाइक उपलब्ध कराकर देश में क्रांति ला दी।