HBN News Hindi

Indian Railway News : 1st AC, 2nd AC और 3rd AC कोच में कौन सा मजेदार, जानिए इनमें क्या है अंतर

AC Coach In railways :देश में हर रोज लाखों में लोग ट्रेनों से यात्रा करते हैं। क्योंकी भारतीय रेलवे को परिवहन के सबसे तेज़ (ac coached indian railway) और किफायती साधनों में शामिल किया जाता है और इससे न केवल पैसों कि बचत होती है ब्लकि पैसों के साथ-साथ समय (Indian Railway News) की भी बचत होती है। 
 | 
Indian Railway News : 1st AC, 2nd AC और 3rd AC कोच में कौन सा मजेदार, जानिए इनमें क्या है अंतर

HBN News Hindi (ब्यूरो ) : भारतीयों में यात्रा की पहली पसंद भी भारतीय रेलवे ही है। क्या आपने कभी रेलवे के टिकट पर ये लिखा देखा होगा कि (difference between third ac and third ac economy coach) सरकार आपकी यात्रा का 50 % से ज्यादा भार वहन करती है। इसी भार को कम करने के लिए अब भारत सरकार ने देश में प्रति यात्री किराया वसूली को बेहतर करने का काम किया है। आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से। 

 


बीते सालों में हुए बड़े बदलाव 


अंग्रेजों ने जब 1853 में मुंबई और ठाणे के बीच पहली रेल यात्रा सर्विस (Features of Different AC Coach) शुरू की थी, तब किसी को कहां अंदाजा था कि भारतीय रेल कभी इस देश और देश के लोगों की जीवन रेखा बन जाएगी।  आज ये सच में तब्दील हो चुका है।  हालांकि भारतीय रेल का रूप रंग तब से अब तक बहुत बदल चुका है और बीते कुछ सालों में इसमें बड़े बदलाव जैसे कि ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ देखने को मिले हैं।  

 

भारतीय रेलवे में एसी कोचेस की जहां एक तरफ संख्या बढ़ रही है, तो इनके कई नए विकल्प भी सामने आए हैं।  चलिए जानते हैं इन सभी के बारे में और इनमें अंतर क्या है उनके बारे में भी। 


कंपनियां कैसे करती हैं कमाई का आंकलन 


जिस तरह से टेलीकॉम कंपनियां अपने रिवेन्यू यानी कि कमाई का आंकलन इस बात से करती हैं कि उनके हर (What are the difference between 1st ac, 2nd ac and 3rd ac) ग्राहक से उन्होंने औसत कितना रुपया कमाया, उसी तरह भारतीय रेलवे ने बीते कुछ सालों में अपने प्रति यात्री आने वाले खर्च और उससे होने वाली कमाई की गणना शुरू की है।  आपने अपनी रेलवे के टिकट पर अक्सर ये लिखा देखा होगा कि सरकार आपकी यात्रा का 50 प्रतिशत से ज्यादा भार वहन करती है।


इसी भार को कम करने के लिए भारत सरकार ने देश में प्रति यात्री किराया वसूली (Indian Railway, Railway News) को बेहतर करने का काम किया है।  इसके लिए ट्रेनों में जहां एसी कोच की संख्या बढ़ाई गई है।  वहीं एसी कोच और स्लीपर कोच में सीटों की संख्या भी बढ़ाई है।  इतना ही नहीं सरकार ने देश में वंदे भारत एक्सप्रेस, गतिमान और अमृत भारत जैसी कई प्रीमियम ट्रेन भी चलाईं हैं।

एक ओर जहां ये यात्रा के समय और खर्च को कम करती हैं, वहीं किराये में बेहतर वसूली का भी साधन बन रही हैं।  इसी के मद्देनजर देश में अब एसी कोच के भी कई विकल्प मौजूद हैं। 


छत से देखा जा सकता खुले आसमान को 


अब भारतीय ट्रेनों में जगह और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह के एसी कोच लग रहे हैं।

 जैसे पहाड़ी जैसे कि कश्मीर या मनोरम (Features of AC Coach) दृश्य वाले जैसे कोंकण रेलवे मार्ग पर सरकार ने विस्टाडोम कोच लॉन्च किए हैं।  इनकी खास बात ये है कि इन कोच में 360 डिग्री रिवॉल्विंग चेयर होती है।  विंडो स्पैन बड़े होते हैं और छत से भी खुले आसमान को देखा जा सकता है।  

इतना ही नहीं देश के अधिकतर विस्टाडोम कोच में पीछे की तरफ एक बड़ा ओपन एरिया होता है, जो बाहर के नजारे को (Indian Railways AC Coaches) एकदम मस्त तरीके से दिखाता है।  ये पूरी तरह एसी कोच होते हैं। 


72 बर्थ से 90 बर्थ 


वहीं दूसरी तरफ सरकार ने थर्ड एसी सेगमेंट में ‘एग्जीक्यूटिव’ कोच (1st AC Features) लॉन्च किए हैं।  इन्हें ‘इकोनॉमी’ कोच भी कहा जाता है।  इनकी खास बात ये है कि सामान्य थर्ड एसी में जहां 72 बर्थ होती हैं, वहीं इनमें करीब 90 बर्थ होती हैं।  इसकी वजह से एक ही कोच में जहां ज्यादा यात्रियों को ले जाया जा सकता है, वहीं आम आदमी को इनका किराया सामान्य थर्ड एसी से कम पड़ता है। 


विकसित किए ‘ट्रेन सेट’ 


भारतीय रेल इस समय जर्मन टेक्नोलॉजी से बने हल्के (Improvment In indian railway) कोच का इस्तेमाल करता है।  शुरुआत में ये तकनीक एसी कोच के लिए इस्तेमाल हो रही थी, बाद में स्लीपर कोच भी इसी तकनीक से बनने लगे।  वहीं स्वदेशी तौर पर भारत ने ‘ट्रेन सेट’ भी विकसित किए हैं।  इनमें इंजन अलग से नहीं होता, बल्कि वह पूरी ट्रेन का ही एक हिस्सा होता है।  इनका इस्तेमाल सरकार ने वंदे भारत जैसी ट्रेनों में करना शुरू किया है। 


दिए हैं प्रीमियम ऑप्शन 


इस तरह से सरकार ने एसी कैटेगरी में कई प्रीमियम कोचेस (Features of Indian Railway Coach) की शुरुआत की है।  इसमें सेकेंड एसी, फर्स्ट एसी कोच तो पहले की तरह ही हैं।  वहीं एसी चेयरकार में सरकार ने कई प्रीमियम ऑप्शन दिए हैं, जिनमें फ्लाइट जैसी सुविधाएं हैं।  

वहीं तेजस एक्सप्रेस जैसी प्राइवेट ट्रेन्स में तो ट्रेन होस्टेस भी होती हैं।  हालांकि इन सभी सुविधाओं के लिए आपको प्रीमियम किराया भी देना होता है। 


आई 86 % की गिरावट 


रेलवे का रिवेन्यू बढ़ाने के लिए सरकार ने एसी कोच का प्रोडक्शन भी बढ़ाया है।  वित्त वर्ष 2019-20 में जहां सरकार 3 कोच फैक्टरी में थर्ड एसी और थर्ड एसी के 997 कोच सालाना बना रही थी।

उनकी संख्या 2024-25 में 2,571 होने का अनुमान है।  जबकि स्लीपर कोच की संख्या में 86 प्रतिशत की गिरावट आई है।  ये 1925 से घटकर महज 278 रहने का अनुमान है।