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Car Tips: कारों में इंजन आगे ही क्यों होता है? बीच में या पीछे क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का राज

Cars Engine Placement : हर किसी के मन में ये सवाल कभी-कभी न तो आता है कि कारों का इंजन ज्यादातर आगे ही क्यों दिये जाते हैं। क्योंकि कुछ कारों (Car Tips) में पीछे होता है और कुछ कारों में आगे की ओर होता है। हमारे भारत में आगे की ओर इंजन देना बहुत ही आम बात है। लेकिन ऐसा ही क्यों होता है।  
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Car Tips: कारों में इंजन आगे ही क्यों होता है? बीच में या पीछे क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का राज

HBN News Hindi (ब्यूरो) : अधिकतर लोगों को आज भी ये जानकारी नहीं होगी की इंजन आगे हो या पीछे हो इस से फर्क पड़ता है। आज हम आपको बताएंगे की (Cars Engine Placement) इंजन प्लेसमेंट से क्यो मायने रखता है और इसका कार पर क्या प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं विस्तार में इस खबर के माध्यम से। 

 


इंजन की प्लेसमेंट 


कार चलाने में सबसे अहम रोल इंजन का होता है।  लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर (Cars Engine Placement Tips) गौर किया है कि कार के इंजन को किसी गाड़ी में आगे, तो किसी में कार के बीच में, तो किसी कार में इंजन को पीछे की तरफ क्यों लगाया जाता है।  कार के इंजन की इस प्लेसमेंट को देखकर भी लोग कार खरीदते हैं।  कार के इंजन की इस प्लेसमेंट कार के (car me injan aage hi kyo hota H) इंटीरियर स्पेस, वेट डिस्ट्रीब्यूशन और ब्रेक परफॉर्मेंस जैसी कई चीजों में फर्क देखने को मिलता है। 

 

सामने की तरफ इंजन


कार में आगे की तरफ बोनेट पर इंजन के (car engine in front) लगे होने से कार का ज्यादातर वजन आगे की तरफ रहता है, जिसकी वजह से गाड़ी चलाने के दौरान ग्रेविटेशनल पुल को बैलेंस करना ड्राइवर के लिए काफी मुश्किल हो जाता है।  लेकिन, कार के इंजन के आगे लगे होने से फायदा ये है कि कार में (jyadatar car me ingen aage hi kyo hota h) कूलिंग बेहतर तरीके से होती है।

 इंजन के आगे लगे होने से कार में बूट स्पेस भी काफी मिल जाता है। 

बीच में इंजन 


ज्यादातर उन कारों में बीच में इंजन लगा (car engine in mid) होता है, जो 2-सीटर होती हैं।  गाड़ियों में मिड-इंजन ड्राइवर सीट के पीछे वाली जगह पर लगा होता है।  कार में बीच में इंजन इसलिए लगाया जाता है, जिससे गाड़ी को वजन को बैलेंस करके रखा जा सके, जिससे कार के आगे और पीछे की पहियों पर बराबर भार पड़े।  मिड-इंजन कारों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि इसमें (Car me ingen bich me kyo nhi hota) ड्राइवर सीट के पीछे बैठने वाली सीट नहीं दी जाती, जिससे कार में केवल दो लोगों के ही बैठने की कैपेसिटी रह जाती है। 

पीछे की ओर इंजन 


रियर-इंजन कार को बैक-इंजन कार (car engine in rear)  भी कहते हैं।  रियर-इंजन कार को स्टार्ट करना ज्यादा आसान रहता है, क्योंकि इसमें कार का वजन पीछे के पहियों पर रहता है।  कार का वजन पीछे की तरफ होने से कार को हैंडल करना (Car me ingen piche kyo nhi hota) भी आसान हो जाता है।  वहीं कार का सड़क के साथ ट्रैक्शन (घर्षण) भी बेहतर होता है।

 भारत में ज्यादातर रियर-इंजन वाली कार नहीं मिलती, क्योंकि इन कारों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ज्यादा होती है।