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Car Tips : कार के आगे वाले शीशे पर इस कारण से होते हैं काले डॉट, बचाते हैं इस नुकसान से

Car Tips : क्या आपको पता है कि कार के आगे जो शीशा होता है उसके ऊपर छोटे-छोटे काले डॉट्स होते हैं और काले रंग की आउटलाइन होती है । और अगर नही पता तो ये खबर आपके लिए काम की साबित हो सकती है। हम आपको बता दें कि ये छोटे-छोटे काले डॉट और काले रंग की आउटलाइन दिखावे के लिए नहीं बनाई जाती, इनका बड़ा रोल होता है । आइए इन काले धब्बों के बारे मे विस्तार से जानते हैं खबर के माध्यम से । 

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Car Tips : कार के आगे वाले शीशे पर इस कारण से होते हैं काले डॉट, बचाते हैं इस नुकसान से

HBN News Hindi (ब्यूरो) : क्या आपने अपनी कार के सामने वाले शीशे को ध्यान से देखा है और अगर नहीं देखा तो कभी देखना । (Car Tips) आपको अपनी के सामने वाले शीशे के ऊपर काले रंग के छोटे-छोटे धब्बे से यानी डॉट्स देखने को मिलेंगे । आइए जानते हैं इन काले डॉट्स और शीशे की आउटलाइन के बारे में विस्तार से ।

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विंडशील्ड फ्रिट्स के बारे में


कोई भी कार सिर्फ ऐसे ही नहीं बनाई जाती। इंजीनियर और डिजाइनर्स की बड़ी टीम (Large team of engineers and designers)  हर एक बारीकी को ध्यान में रखकर अलग-अलग चीजों को डिजाइन करती है। अब कार की विंडशील्ड पर लगे ब्लैक डॉट को ही ले लीजिए। बहुत से लोगों को इनके बारे में जानकारी नहीं होगी। 


Car Tip : कुछ लोगों को तो यह ब्लैक डॉट बेफिजूल लग सकते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है। विंडशील्ड पर दिए गए ब्लैक डॉट्स (black dots on windshield) को विंडशील्ड फ्रिट्स (Windshield Frits) कहते हैं। यह असल में विंडशील्ड को डिस्लोकेट होने से रोकते हैं और साथ ही हीट की समान रूप से विंडशील्ड पर डिस्ट्रीब्यूट करते हैं।

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फ्रेम को जोड़ने के लिए किसका होता है इस्तेमाल 


विंडशील्ड ग्लोस (windshield gloss) को कार के फ्रेम से जोड़ने के लिए ग्लू/सीलेंट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, ग्लोस की सरफेस काफी चिकनी होती है। इसपर ग्लू/सीलेंट की पकड़ कमजोर रहेगी और ओवर द टाइम पीरियड विंडशील्ड के डिस्लोकेट होने का खतरा रहेगा। 
इससे बचने के लिए विंडशील्ड फ्रिट्स दिए जाते हैं। यह ग्लास और कार फ्रेम के बीच कॉन्टेक्ट प्वाइंट का काम करते हैं। इनसे ग्लास की सरफेस खुरदरी जैसी हो जाती है, जिससे ग्लू ज्यादा मजबूती के साथ ग्लोस को कार फ्रेम से जोड़े रखता है।

ब्लैक डॉट का काम
 

इसके साथ ही यह ब्लैक डॉट (विंडशील्ड फ्रिट्स) सीलेंट को पिघलने से भी रोकते हैं। भारत के ज्यादातर हिस्सों में साल के ज्यादातर समय गर्म मौसम रहता है। 40 से 45 डिग्री टेंपरेचर काफी आम हो चुका है। ऐसे में तेज धूप और टेंपरेचर के बढ़ने से सीलेंट पिघल सकता है।

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यहां भी विंडशील्ड फ्रिट्स काम में आते हैं। यह सीलेंट को पिघलने से बचते हैं और हीट को विंडशील्ड पर समान रूप से डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। इनके होने से ऑप्टिकल डिस्टोर्शन या "लेंसिंग" को भी कम करने में मदद मिलती है। यानी, विंडशील्ड फ्रिट्स बहुत काम की चीज है और काफी दिमाग लगाकर बनाया गया होगा।