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UP Farmer : चरी की खेती से कर सकते हैं मोटी कमाई, पशुओं के लिए भी बेहद फायदेमंद

Chari Farming: चरी की खेती के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान चरी की फसल की बड़े पैमाने में खेती करते हैं, जिससे उनको लाखों रुपये की इनकम होती है। इसके अलावा दूध देने वाले जानवरों के लिए ये चारा बेहद फायदेमंद है इससे पशुओं में दूध उत्पादक की क्षमता बढ़ जाती है। आइए जानते हैं पशुओं को क्या खिलाने से कैसे दूध का उत्पादन बढ़ जाता है।
 
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UP Farmer : चरी की खेती से कर सकते हैं मोटी कमाई, पशुओं के लिए भी बेहद फायदेमंद

HBN News Hindi (ब्यूरो) :भारत में खेती के बाद अब बड़े पैमाने पर पशुपालन किया जा रहा है। देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशुपालन का रोजगार अब तेजी से बढ़ता जा रहा है लेकिन कम जानकारी के अभाव में पशुपालकों को बहुत बार भारी नुकसान भी उठाना पड़ता। आपको बता दें कि गेहूं की कटाई के(Chari cultivation) बाद चरी की फसल किसानों के लिए काफी कारगर साबित होंगी ।आइए जानते हैं चरी के फायदो के बारे में।

 

 

बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर कमा सकते हैं भारी मुनाफा

 

कुछ फसलें गर्मी के मौसम की हैं, जिन्हें लगाकर किसान खासा मुनाफा कमा सकते हैं। इनमें से एक चरी की फसल है, जो किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसान हरे चारे के रूप में बड़े पैमाने पर इसकी खेती से हजारों रुपये प्रतिदिन(चरी की खेती) कमा सकते हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा फायदा इस (animals milk production)फसल से दूध देने वाले जानवर को है। क्योंकि, इसका चारा खिलाने से उनके दूध उत्पादन की क्षमता पहले से ज्यादा हो जाती है। साथ ही जानवर भी कई बीमारियों से मुक्त हो जाते हैं।

किसानों को होंगे डबल फायदा


कृषि विशेषज्ञों के अनुसार  (agriculture expert) गेहूं की कटाई के बाद चरी की फसल किसानों के लिए काफी कारगर होगी। गेहूं की फसल काटने के बाद दो बार ट्रैक्टर से जुताई कर किसान अपने खेत में चरी के बीज की बुवाई कर सकते हैं।1 महीने में तैयार होने वाली चरी की फसल हरी खाद के रूप में किसानों के काम आती है।

इसके साथ ही किसान हरे चारे के रूप में बड़े पैमाने पर इसकी खेती से हजारों (animals milk production) रुपये प्रतिदिन कमा सकते हैं। आगे उन्होंने कहा कि इस फसल से किसानों को डबल फायदा होता है। क्योंकि, दूध देने वाले जानवरों के लिए ये चारा बेहद फायदेमंद है। इससे जानवरों में दूध उत्पादक की क्षमता बढ़ जाती है।

इतने दिनों में होगी चरी की पहली कटाई


इसका तना मोटा, (milk production se kisano ko honge bade fayde)अधिक रस वाला तथा अधिक समय तक हरा रहता है। पूसा चरी संकर-109, बहुकटाई वाली संकर किस्म है जो 55-60 दिनों में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह विभिन्न बीमारियों के लिए प्रतिरोधी है। बुवाई करते समय छोटे दाने वाली किस्मों के लिए बीजदर 10-12 किग्रा। प्रति हैक्टेयर रखें। उन्होंने कहा कि किसान बुवाई के समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25 सेमी। एवं पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेमी। रखें। बुवाई के समय बीज की गहराई 1।5-2।0 सेमी। उपयुक्त है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चरी की बड़े पैमाने में खेती 


चरी की खेती के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान चरी (wheat harvesting update2024) की फसल की बड़े पैमाने में खेती करते हैं, जिससे उनको लाखों रुपये की इनकम हो रही है। जबकि पशुओं के लिए हरा चारे की किल्लत भी नहीं होती है।

40 प्रतिशत किसानों का अनुदान


चरी की खेती के लिए किसानों को 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। इसके लिए किसानों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक (wheat harvesting news update ) और खतौनी के साथ कृषि रक्षा इकाई केंद्र पर संपर्क करना होगा