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Pulses Inflation : मांग बढ़ने के कारण दाल के रेट आसमान पर, जानिए किस महीने में मिलेगी राहत

Pulses Inflation in India : बढ़ती महंगाई आम जनता को एक बार फिर झटका देने वाली  है। लोगों को खाने-पीने की चीजों के मामले में अभी कुछ और समय तक महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर दालों के दामों में जनता को जल्दी राहत नहीं मिलने वाली है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दालों की सप्लाई उनकी मांग के हिसाब से नहीं हो पा रही है।आइए जानते हैं इस पूरी खबर के बारे में।
 
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Pulses Inflation : मांग बढ़ने के कारण दाल के रेट आसमान पर, जानिए किस महीने में मिलेगी राहत

HBN News Hindi (ब्यूरो) : रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है कि(Inflation in india)दालों की कीमतें तब तक ज्यादा बनी रह सकती हैं, जब तक कि बाजार में नई फसल की आपूर्ति न शुरू हो जाए। नई फसलों की आवक कुछ महीनों में जाकर शूरु होगी। तब तक आम जनता को इस महंगाई से राहत नहीं मिलने वाली है।आइए जानते हैं किस महीने में जाकर आम जनता को राहत  मिलेगी। 

मांग के हिसाब से नही हो पा रही सप्लाई 


आम लोगों को खाने-पीने की चीजों के मामले में अभी कुछ और समय(दालों की मांग) तक महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। खासकर दालों के मामलों में (दालों की कीमतें)कीमतों में जल्दी नरमी आने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि दालों की आपूर्ति उनकी मांग के हिसाब से नहीं हो पा रही है।


अक्टूबर महीने से दाल के दामों में मिल सकती है राहत


 यह आशंका जाहिर की जा रही है कि (pulses prices) देश में दालों की कीमतें नई फसलों की आवक तक ज्यादा बनी रह सकती हैं, नई फसलों की आवक अक्टूबर महीने में जाकर शुरू होगी। इसका मतलब हुआ कि अक्टूबर महीने से पहले दालों की कीमतों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।

क्यों हो रही दालों में ज्यादा महंगाई


देश में अभी दालों की जितनी डिमांड है, (pulses production)उतनी सप्लाई नहीं हो पा रही है। मांग और आपूर्ति के असंतुलन के चलते दालों की कीमतें टाइट चल रही हैं। दालों की महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने से ओवरऑल खाद्य महंगाई पर भी असर हो रहा है।

भारत है दालों का नंबर वन उत्पादक 


अभी सरकार की ओर से दालों की कीमतों को (दालों की आपूर्ति)काबू में रखने के काफी प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल पा रही है। भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन खपत उत्पादन से भी ज्यादा है। ऐसे में भारत को दालों का आयात करना पड़ जाता है। 2022-23 के फसल वर्ष में देश में दालों का अनुमानित उत्पादन 26.05 मिलियन टन था, जबकि खपत का अनुमान 28 मिलियन टन था।

अप्रैल महीने में दालों की कीमत
अभी बाजार में तुर यानी अरहर, चना, उड़द आदि दालों में (pulses in India)ज्यादा महंगाई दिख रही है। महीने में दालों की महंगाई 16.8 फीसदी रही थी। सबसे ज्यादा 31।4 फीसदी महंगाई अरहर दाल में थी। इसी तरह चना दाल में 14.6 फीसदी और उड़द दाल में 14.3 फीसदी की दर से महंगाई थी। फूड बास्केट में दालों का योगदान 6 फीसदी के आस-पास रहता है।