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Moong cultivation : गर्मियों के मौसम में मूंग की खेती देगी गजब की पैदावार, अपनाएं ये तरीका

Moong Seeds ये भारत में एक प्रमुख दाल है। भारत में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में मूंग का महत्वपूर्ण स्थान है। किसान मूंग की खेती करके बेहतर उत्पादन और बंपर मुनाफा कमा सकते हैं। ऐसे में अगर आप भी मूंग की खेती करना चाहते हैं तो ये जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि इसकी उपज की मात्रा को कैसे बढ़ाएं जिससे बंपर पैदावार हो सकें।आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
 
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Moong cultivation : गर्मियों के मौसम में मूंग की खेती देगी गजब की पैदावार, अपनाएं ये तरीका

HBN News Hindi (ब्यूरो) : मूंग की खेती गरमा फसल के तौर पर की जाती है। ये फसल कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसकी डिमांड भी मार्केट में पूरे वर्ष रहती है इसकी खेती से किसान पूरे वर्ष बंपर मुनाफा कमा सकते हैं। बता दें कि  मूंग की खेती कम लागत(Moong ki kheti) और कम समय में आसानी से की जा सकती हैऔर इसकी खेती के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 

मूंग के बीज का वितरण


उन्होंने बताया कि, बिहार में 80 प्रतिशत से ज्यादा मूंग की खेती गरमा मौसम में की जाती है। बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से राज्य के 4,06,107 किसानों के बीच 33,307 क्विंटल (गर्म मौसम में मूंग की खेती को बढ़ावा )मूंग के बीज का अनुदानित दर पर वितरण किया गया इसमें 24% प्रोटीन होने के साथ-साथ रेशे और आयरन की भी काफी अच्छी मात्रा पाई जाती है।

 

कम लागत में अधिक मुनाफा


गरमा मूंग की खेती न केवल धान-गेहूं फसल चक्र में तीसरे फसल के रूप में फसल सघनता को बढ़ाती है, बल्कि फसलों के उत्पादन, उत्पादकता और मिट्टी की उर्वरा-शक्ति में भी वृद्धि लाती है। मूंग की फसल अपने वृद्धि काल में सबसे ज्यादा गरमी (Moong Seeds)सहन कर सकती है और किसान इसकी खेती करके कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं।  गरमा मौसम में मूंग की खेती करने के किसानों को दो फायदे हो सकते हैं। पहला किसान मूंग के फली की एक तोड़ाई कर उपज प्राप्त कर सकते हैं और दूसरा फली तोड़ाई के उपरान्त इसके पौधे को मिट्टी में मिलाकर बड़ी मात्रा में हरी खाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

 

खेती का प्रत्यक्षण इतने गावों में किया जा रहा है


बताया गया है कि, बिहार राज्य में जलवायु अनुकूल कृषि (Agriculture News Updated)कार्यक्रम के तहत् अल्पावधि (60-70 दिनों) के मूंग के प्रभेदों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम में फसल अवशेष का प्रबंधन करते हुए जीरो टिलेज तकनीक से मूंग के खेती का प्रत्यक्षण प्रत्येक जिला में 05-05 चयनित गांवों अर्थात कुल 180 गांवों में किया जा रहा है।

 

 

मूंग की खेती का प्रत्यक्षण 


इस कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित गांवों में 8,030 एकड़ क्षेत्र में जीरो(Moong cultivation) टिलेज तकनीक से मूंग की खेती का प्रत्यक्षण किया गया है। आत्मा योजना तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से राज्य के किसानों को मूंग की खेती का प्रत्यक्षण और परिभ्रमण कराया जा रहा है, जिससे किसानों में इसके तकनीक के हस्तांतरण हो रहा है।