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Arhar Cultivation : एक बार बुवाई और 5 साल तक बंपर कमाई, जानिए अच्छी किस्में और खेती का तरीका

Farming Tips : बदलते समय में किसान भी अपने खेती करने के तरीके में बदलाव ला रहे हैं किसान अब अपने परंपरागत खेती के अलावा दूसरी खेती की तरफ  भी ध्यान दे रहे हैं ताकि वो कम लागत में अच्छी पैदावार से अच्छा खासा मुनाफा कमा सकें।आज हम आपको ऐसी ही एक फसल के बारे में बताएंगे जिसकी खेती से किसान लाखों रुपये तक की कमाई कर सकते हैं।आइए जानते हैं उस खास फसल के बारे में।
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Arhar Cultivation:  एक बार बुवाई और 5 साल तक बंपर कमाई, जानिए अच्छी किस्में और खेती का तरीका

HBN News Hindi (ब्यूरो) :किसान अब अपने परंपरागत खेती के अलावा दूसरी खेती की तरफ ध्यान दे रहे हैं ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके,तो आज हम आपको अरहर की खेती के बारे में बतांएगे। वैसे तो अरहर की खेती हमेशा से किसानों के लिए फायदे का सौदा रही है।इस दाल की खास बात (wild pigeon pea ke fayde)ये है कि यह एक बार लगाने के बाद ये 5 साल तक फलती है जिससे किसान इस जंगली अरहर की खेती से लाखों रुपए तक की कमाई कर सकते हैं।अगर आप भी इस खरीफ सीजन में अरहर कि खेती करना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए है। आप भी बताए गए इन तरीकों से खेती करके बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

 

 

इन क्षेत्रों में किसान कर रहे खेती


सागर में प्रगतिशील कुछ किसान (wild pigeon pea Cultivation) जंगली अरहर की खेती कर रहे हैं। इसकी खेती से वह लाखों रुपए की कमाई भी कर रहे हैं। साथ ही इसका संरक्षण करने के लिए देश भर के ढाई लाख किसानों को इसका वितरण भी कर चुके हैं। उन्हें बीज बनाने की तकनीक भी सिखाते हैं, ताकि इसका ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो सके। 

एक बार लगाने से 10 बार उत्पादन 
एक किसान ने बताया एक एकड़ में 8 से 12 कुंटल तक जंगली (Arhar ke Cultivation se honge badhiya profit)अरहर की पैदावार हो जाती है। इसे एक बार लगाने से 10 बार उत्पादन होता है। 5 साल में इसकी लंबाई 12 फीट तक हो जाती है। आगे बताया कि यूपी और बिहार के बीच एक इलाका है बस्तर, करीब 14 साल पहले बस्तर के जंगल में उन्हें एक पेड़ मिला था, जिसमें 10 से 15 फली लगी थी।

 

 


कम जगह में भी की जा सकती है इसकी खेती
किसान ने बताया अगर कोई किसान उद्यान लगाना चाहता है और पेड़-पौधों की वजह से (Jungli Arhar ki Kheti ke liye km space)उसके पास जगह नहीं है, तो जंगली अरहर को लगाकर उगा सकता है। एक एकड़ की जगह में केवल एक किलो बीज ही लगता है। इसमें खेत के अंदर मेड़ बनाकर 5 से 7 फीट के अंतर पर एक-एक पौधा लगाया जाता है। एक बार लगाने के बाद अच्छे से खाद पानी करते रहें, जिससे यह पौधा 5 साल तक चलता है।

 

इस किस्म के लिए पानी की कम जरूरत


आपको बता दें कि अरहर की इस किस्म को बहुत कम पानी की (wild pigeon pea Farming)जरूरत होती है। जब इसे जून या जुलाई में लगाते हैं तो बारिश के समय सिंचाई की सितंबर तक कोई जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अक्टूबर, नवंबर में 20 दिन के अंतराल में 2 या 3 पानी (सिंचाई) की जरूरत होती है। सिंचाई खुली पद्धति से बहा कर भी कर सकते हैं और इस किस्म के लिए टपक सिंचाई व्यवस्था सर्वोत्तम होती है।

 

 

इन किस्मों काे ऐसे बोएं

 

अरहर की इस किस्म को दो तरीके से लगाया जा सकता है, पहला नर्सरी तैयार करके इसके लिए 50 किलोग्राम मिट्टी 50 किलोग्राम गोबर की(जंगली अरहर की खेती का तरीका) पची खाद या केंचुआ खाद, इनमें 1 किलोग्राम चूना पाउडर और 1 किलोग्राम नीम का पाउडर सभी को आपस में मिलाकर, 2।5×6 इंच के पॉली बैग में भरके 1 से 1।5 इंच की गहराई में बीज डालें। इस विधि में 1 एकड़ में 750 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। दूसरा तरीका सीधा बीज खेत में लगाना होता है। जब बीज सीधा खेत में लगाते हैं तो 2 दाने एक साथ लगाने चाहिए, इसकी गहराई 1 से 1।5 इंच रखनी है। इस स्थिति में प्रति एकड़ में 1 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

 

 

 

जंगली अरहर की खेती करने का पूरा प्रोसेस


सबसे पहले बीजों को उपचारित करने से पहले 3 से 4 घंटे बीजों को तेज धूप दिखाएं। इसके बाद 2 लीटर भारतीय गाय का गोमूत्र ताजा या पुराना, 200 ग्राम धनिया पाउडर, और 200 ग्राम तीखी लाल मिर्च का पाउडर का घोल बनाकर घोल में बीजों को 10 मिनट तक डूबा रहने दें, इसके बाद बीजों को निकाल कर 10 मिनट तक छाया में फैलाकर(जंगली अरहर की खेती कैसे करें) रखें या सुखाएं फिर खेत में या नर्सरी में रोपें।